पवैया विशिषà¥à¤Ÿ अंदाज में लगी सà¥à¤•ूल में पाठशाला
( विनय शरà¥à¤®à¤¾ ) : पवैया ने कहा à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति हमें सिखाती है कि हमें यदि कोई कà¥à¤›
देता है तो उसके पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हम आदर सà¥à¤µà¤°à¥‚प कृतजà¥à¤žà¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤•ट करें। इसीलिये धरती माà¤, सूरà¥à¤¯
देव, माता-पिता, गà¥à¤°à¥‚जन यहाठतक नदियों सहित समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ पà¥à¤°à¤•ृति को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करना हमारी
संसà¥à¤•ृति की सà¥à¤¦à¥€à¤°à¥à¤˜ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ है। शासकीय माधà¥à¤¯à¤®à¤¿à¤• विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ मोतीà¤à¥€à¤² में
“मिल बाचें मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶” कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के तहत विशिषà¥à¤Ÿ अंदाज में लगी थी पाठशाला.