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संभाग में 29 लाख 64 हजार 687 मामलों में विभिन्न सेवायें दी गईं

ग्वालियर। लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत ग्वालियर संभाग में इस अधिनियम के प्रारंभ से लेकर अभी तक 29 लाख 64 हजार 687 विभिन्न मामलों में सेवायें दी गई हैं। संभागीय कमिश्नर कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अधिनियम के प्रारंभ से लेकर अभी तक 30 लाख 98 हजार 481 विभिन्न मामलों में आवेदन प्राप्त हुए थे, इनमें से 29 लाख 64 हजार 687 मामलों में विभिन्न सेवायें संबंधितों को उपलब्ध कराई गई हैं। एक लाख 33 हजार 794 मामलों में जानकारियाँ देने का सिलसिला जारी है।

शिवपुरी जिले में सर्वाधिक 9 लाख 73 हजार 754 प्रकरणों में जानकारी दी गई है। ग्वालियर जिले में 6 लाख 98 हजार 962, गुना जिले में 6 लाख 80 हजार 308, दतिया जिले में 3 लाख 10 हजार 328 और अशोकनगर जिले में 3 लाख एक हजार 335 मामलों में सेवायें दी गई हैं।

87 हजार 750 रूपए का जुर्माना भी ठोका

निर्धारित समय अवधि में सेवायें उपलब्ध नहीं कराने की शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित पदाभिहित अधिकारी को दण्डित करने का प्रावधान भी लोक सेवा गारंटी अधिनियम में किया गया है। समयावधि पश्चात निराकृत प्रकरणों में 87 हजार 750 रूपए की जुर्माना राशि से पदाभिहित अधिकारियों को दण्डित किया गया है। शिवपुरी जिले के पदाभिहित अधिकारियों पर 55 हजार 750 रूपए, गुना जिले के पदाभिहित अधिकारियों पर 11 हजार और दतिया जिले के पदाभिहित अधिकारियों पर 21 हजार रूपए का जुर्माना लगाकर जुर्माने से प्राप्त रूपए की राशि 17 हजार 600 आवेदकों को भुगतान की गई है, जिन्हें समय-सीमा के अंदर सेवायें नहीं दी गई थीं।

जुर्माने की राशि 500 रूपए से कम तथा 5 हजार से अधिक नहीं होगी

अधिनियम में समय-सीमा में कार्य न करने या अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को दण्डित करने का प्रावधान किया गया है। द्वितीय अपील अधिकारी की राय के अनुसार पदाभिहित अधिकारी बिना पर्याप्त तथा युक्तियुक्तकरण से सेवा प्रदान करने में असफल रहा है तो वह पदाभिहित अधिकारी पर ऐसी एक मुश्त शास्ति अधिरोपित कर सकेगा, जो 500 रूपए से कम तथा 5 हजार से अधिक नहीं होगी। या ऐसी विलम्ब के लिये 250 रूपए प्रतिदिन के मान से शास्ति अधिरोपित कर सकेगा, जो अधिकतम 5 हजार रूपए हो सकेगी।

23 विभागों की 160 सेवाओं को दायरे में लिया है

लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 के अंतर्गत 23 विभागों की 160 सेवाओं को अधिनियम के दायरे में लिया गया है।

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