à¤à¤¾à¤µ का अà¤à¤¾à¤µ होतो पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ समापà¥à¤¤ हो जाता है: पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤°à¥¤ शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦ à¤à¤¾à¤—वत कथा वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ कागशिलाा पीठाधीशà¥à¤µà¤° महामंडलेशà¥à¤µà¤° महंत वैषà¥à¤£à¤µà¥€ साधà¥à¤µà¥€ सà¥à¤¶à¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ ने आज कथा के समापन दिवस पर सà¥à¤¦à¤¾à¤®à¤¾ चरितà¥à¤° , राधा-कृषà¥à¤£ चरितà¥à¤° का वरà¥à¤£à¤¨ करते हà¥à¤ कथा को विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से कहते हà¥à¤ कहा कि à¤à¤¾à¤µ में अà¤à¤¾à¤µ होतो पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ समापà¥à¤¤ हो जाता है। इस मौके पर सà¥à¤¦à¤¾à¤®à¤¾ चरितà¥à¤° का कलाकारों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मंचन किया गया।
शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦ à¤à¤¾à¤—वत कथा à¤à¤—वान की आरती पापियों के पाप को है तारती आरती व पूजा नà¥à¤¯à¤¾à¤¸ के संरकà¥à¤·à¤• à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤µà¤¾à¤—ताधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· डॉ. सतीश सिंह सिकरवार , पंडित विजय कबà¥à¤œà¥‚ , डॉ. राम पांडे, सहित अनà¥à¤¯ à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ ने किया। संचालन सà¥à¤¨à¥€à¤² जैन ने किया। इस अवसर पर फूलबाग में उमडी à¤à¥€à¤¡ ने पà¥à¤·à¥à¤ª वरà¥à¤·à¤¾ की। शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¤à¤¾à¤—वत कथा को सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ साधà¥à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ ने कहा कि कहा कि à¤à¤—वान के दरà¥à¤¶à¤¨ शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦ à¤à¤¾à¤—वत पà¥à¤°à¤¾à¤£ में होते हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि à¤à¤—वान à¤à¤¾à¤µ के à¤à¥‚खे होते हैं। और जिसके à¤à¤¾à¤µ में अà¤à¤¾à¤µ होता है , उसका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ समापà¥à¤¤ हो जाता है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि बहà¥à¤¤ दूर से कथा का शà¥à¤°à¤µà¤£ करने आठहैं उनके मन के अचà¥à¤›à¥‡ à¤à¤¾à¤µ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है। à¤à¤¾à¤µ में ही à¤à¤—वान का वास होता है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ का विवाह रूकमणी से जरूर हà¥à¤† , मगर शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ à¤à¤—वान का परिचय रूकमणि से नहीं राधा से है और शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ à¤à¤—वान ने राधा मईया की मांग à¤à¤°à¥€ थी। साधà¥à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ ने शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ सà¥à¤¦à¤¾à¤®à¤¾ की कथा का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से वरà¥à¤£à¤¨ किया और कहा कि मितà¥à¤°à¤¤à¤¾ तो कृषà¥à¤£ सà¥à¤¦à¤¾à¤®à¤¾ की तरह होना चाहिये।
साधà¥à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ ने किया बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— महिला व पà¥à¤°à¥‚षों का समà¥à¤®à¤¾à¤¨
शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¤à¤¾à¤—वत कथा के दौरान साधà¥à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ ने मंच पर शहर के अनेक बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— महिला à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¥‚षों का तिलक लगाकर व माला पहनाकर समà¥à¤®à¤¾à¤¨ किया।
शंख बजा तो खिंचा सनà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤¾
शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦ à¤à¤¾à¤—वत कथा की आरती के दौरान शहर के विकà¥à¤°à¤® राणा ने मंच पर शंख फूंकना शà¥à¤°à¥‚ किया तो कथा सà¥à¤¥à¤² पर सनà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤¾ खà¥à¤‚िाच गया। साधà¥à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ ने देखा कि पांच मिनिट से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ का समय हो गया , तब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ईशारा कर शंख बजाना बंद करवाया। राणा का २०-२५ मिनट तक शंख बजाने का रिकारà¥à¤¡ है।
कथा सà¥à¤¥à¤² पर आज होगा हवन और à¤à¤‚डारा
शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦ à¤à¤¾à¤—वत कथा के समापन पर १९ सितंबर को १०८ हवनकà¥à¤‚डों पर हवन पà¥à¤°à¤¾à¤¤: सात बजे से शà¥à¤°à¥‚ होगा , जो दोपहर १२ बजे तक चलेगा। इसी दिन शाम को चार बजे से à¤à¤‚डारा शà¥à¤°à¥‚ होगा जो देर रात तक चलेगा।