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प्रभारी एचओडी सहित 3 को नोटिस, स्टोर इंचार्ज को हटाया, होगी जांच

ग्वालियर। कमलाराजा अस्पताल में रविवार को गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने से 40 महिलाओं की तबियत बिगड़ गई थी। इस मामले में संभागीय कमिश्नर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश देते हुए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन एवं जेएएच के प्रभारी अधीक्षक ने सोमवार को सुबह सेंट्रल दवा स्टोर एवं केआरएच का निरीक्षण कर डॉक्टरों से घटना की जानकारी ली हैं। इस मामले में गायनिक विभाग की प्रभारी एचओडी, ड्यूटी स्टॉफ नर्स, स्टोर इंचार्ज को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं स्टोर इंचार्ज को हटाकर डॉ. देवेन्द्र कुशवाह को स्टोर का प्रभार सौंपा गया है। उधर सीएमएचओ एवं महिला सशक्तिकरण अधिकारी ने भी केआरएच पहुंचकर मामले की जांच की है।

संभागीय कमिश्नर एसएन रूपला ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के साथ ही एडीएम शिवराज वर्मा, जेएएच अस्थि रोग विभाग के एचओडी डॉ. समीर गुप्ता एवं नेत्र विभाग के एचओडी डॉ. यूएस तिवारी की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। ये कमेटी जल्द से जल्द रिपोर्ट संभागीय कमिश्नर को सौंपेगी।

उधर गजराराजा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एसएन आयंगर एवं जयारोग्य अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. संदीप चंदेल सोमवार को सुबह 9.30 बजे कमलाराजा अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में पहुंचे। यहां पर उन्होंने पहले तो एमपी सिलिंन इंजेक्शन के बारे में जानकारी ली।

स्टॉफ ने बताया कि एमपीसिलिन इंजेक्शन बैज नंबर बी-6139 का है। इंजेक्शन को डिजोल्व करने के लिए जिस नार्वसलाइन की बोतल एवं डिस्टल वॉटर का प्रयोग किया गया था, उनको कल्चर रिपोर्ट के लिए जीआर मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयलोजी विभाग में भेजा गया है। जहां इसका टेस्ट लगाया जा चुका है और रिपोर्ट 48 घंटे बाद मिलेगी। वहीं एमपीसिलिन के जिस बैज के इंजेक्शन के उपयोग के बाद तबियत बिगड़ी थी, उस बैज की इंजेक्शन की बॉयल को ड्रग इंस्पेक्टर अजय ठाकुर को जांच के लिए सौंप दिया गया है।

स्टोर इंचार्ज पर गिरी गाज

जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एसएन आयंगर एवं प्रभारी अधीक्षक डॉ. चंदेल ने सेंट्रल दवा स्टोर का भी निरीक्षण किया है। यहां पर स्टोर इंचार्ज को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही स्टोर इंचार्ज डॉ. योगेश करसेड़िया को हटाकर उनकी जगह डॉ. देवेन्द्र कुशवाह को स्टोर का प्रभार सौंपा गया है। वहीं केआरएच में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रभारी एचओडी डॉ. वृन्दा जोशी एवं ड्यूटी स्टॉफ नर्स को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

इन बिंदुओं पर तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

-घटना किन परिस्थितियों में हुई?

-घटना से संबंधित रोगियों को चढ़ाए गए सलाइन एवं दी गई मेडीसिन के रख-रखाव व उपयोग में किसी स्तर पर क्या कोई त्रुटि हुई है?

- यदि कोई त्रुटि हुई तो इसके जिम्मेदार कौन हैं? इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सुझाव लिए जाएंगे।

किस जांच में क्या पता चलेगा

औषधी विभाग: बैज नंबर बी 6139 से लिए गए सैंपल की जांच से यह पता चलेगा कि दवाई में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ तो नहीं थी। हालांकि डीन एवं प्रभारी अधीक्षक को बाहर से जांच करने पर दवा में कोई रंग परिवर्तन या अन्य कोई दिक्कत नहीं दिखाई दी है।

माइक्रोबॉयलोजी विभाग: कल्चर टेस्ट से पता चलेगा कि नर्वसलाइन या डिस्टल वॉटर में किसी प्रकार का फंगल या बैक्टेरियल इंफेक्शन तो नहीं था। इसलिए इंजेक्शन देने के बाद बची हुई बोतल को जांच के लिए भेजा गया है।

सीएमएचओ भी पहुंचे जांच करने

कलेक्टर राहुल जैन के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ. एसएस जादौन एवं महिला बाल विकास के महिला सशक्तिकरण अधिकारी भी केआरएच पहुंचे थे। यहां पर उन्होंने डॉक्टर एवं ड्यूटी पर मौजूद रहे स्टाफ के लिखित में बयान लिए हैं। साथ ही कंबल की कमी को लेकर भी पूछताछ की गई, लेकिन स्टाफ का कहना था कि पर्याप्त कंबल हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य एवं दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली गई।

क्या थी घटना

कमलाराजा अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में रविवार रात 9 से 9.30 बजे के बीच महिलाओं को एमपीसिलिन इंजेक्शन लगाया गया था। इसके बाद 56 में से करीब 40 महिलाओं को कप-कंपी के साथ ठंड लगने लगी और बुखार आ गया था। 5 महिलाओं की हालत अधिक खराब होने पर आईसीयू रैफर किया गया था। इनमें से जिन दो महिलाओं की हालत अधिक खराब थी, उनमें से एक की हालत में अब सुधार है, जबकि दूसरी महिला को ठंड बुखार के बाद अब झटके आने लगे हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक महिला को इंजेक्शन लगा ही नहीं है।

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