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मोदी ने बदल दिया बहुत कुछ, पर ये क्या कर बैठे माया-ममता-राहुल?

मायावती, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल ये सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए वरदान से कम नहीं हैं। उनकी कुंडली में लिखा होगा कि आपके जितने दुश्मन होंगे आप उतने ही मज़बूत होते जाएंगे। पुराने नोट बंद करने से होनेवाली दुश्वारियों की चर्चा अब भ्रष्टाचार बनाम मोदी के देश प्रेम में बदल चुकी है।
दरअसल, गोवा से निकलकर गाज़ीपुर तक पहुंचते–पहुंचते नरेंद्र मोदी ने देश की राजनीतिक चर्चा को बदल दिया है। टीवी चैनलों पर एक के बाद एक प्रेस-कांफ्रेंस का दौर चल रहा है। एक साथ फोर विंडो में बसपा, कांग्रेस, तृणमूल और आप के नेता जनता के कंधे पर रखकर मोदी पर अपनी बंदूक चला रहे हैं।
भारत में 80 फीसदी से ज्यादा करसी पांच सौ और एक हज़ार के नोटों की है। ऐसे में पुराने नोट बंद करने से होने वाली त्राहि-त्राहि को समझने में सरकार से चूक हुई। विपक्ष की गेंद पर थोड़ा लड़खड़ाने के बाद मोदी ने गेंद अपने हाथ में ले ली और अब वो बिल्कुल सही लाइन और लेंथ की गेंद फेंक रहे हैं। सपा हो या बसपा या फिर कांग्रेस, इन पार्टियों के नेताओं की छवि ईमानदार नेताओं की तो बिल्कुल भी नहीं है। इन पर लगे घोटालों और जांच की फेरहिस्त लंबी है।
इधर, आम जनधारणा के मुताबिक नेताओं के पास ही सबसे ज्यादा काला धन है। मोदी जानते हैं कि लोग इस बात पर यकीन करते हैं और उन्हें आज बस यही याद दिलाने की ज़रूरत है कि उनके विरोधी भ्रष्टाचार के पोषक हैं। अगर विपक्ष साथ खड़े होकर मोदी के इस फैसले का विरोध करता है, तो उनके साथ खड़ा हर राजनेता भ्रष्टाचारी नज़र आएगा। यही एक वजह भी है कि नीतीश कुमार और वामदल अब तक इनके साथ खुलकर खड़े नहीं हो रहे।
इधर, देश में जनता का मूड भी मिला-जुला ही दिखाई दे रहा है और मोदी के लिए यही बड़ी राहत की बात है। आसपास के लोगों से बात करने की मेरी आदत है। पिछले कुछ दिनों में सड़क पर रेहड़ी लगाने वाले और नौकरीपेशा मिडिल क्लास के कई व्‍यक्‍तियों से जो भी मेरी बातचीत हुई है, उसमें मोदी की लोकप्रियता और उनपर इस तबके का विश्वास कम नहीं हुआ है। व्यापारी गाली दे रहे हैं, लेकिन गरीब जनता टीवी चैनलों पर कैश पकड़े जाने की ख़बरों में सुख महसूस कर रही है। आगे इसका असर देश और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा ये इंटलेक्चुअल्स के लिए बहस की बात है, गरीब और मिडिल क्लास के लिए नहीं।
यकीनन राजनीति का फलक ही इतना विशाल होता है कि अगर लोगों को थोड़े अच्छे सपने दिखाए जाएं, कुछ अच्छे जुमले सुनाए जाएं, तो बदले में वे तकलीफ़ें भूल जाते हैं, फिर मोदी के पास इनकी कोई कमी नहीं है। ऊपर से मोदी की अपनी छवि और आचरण दोनों ही ईमानदार नेता की है, जबकि उनके सामने लामबंद हो रहे नेताओं की छवि ठीक इसके उलट है। ये विपक्ष की लामबंदी ही मोदी की ताकत बन रही है और गोवा की इमोशनल अपील अब गाज़ीपुर तक पहुंचकर पूरी तरह भ्रष्टाचार और अमीर विरोधी मोदी बनाम भ्रष्टाचारी विपक्ष में तब्दील हो गई है। जय हो विपक्ष।

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