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भाजपा का आरोप- नक्सलियों की चिट्ठी में दिग्विजय का फोन नंबर मिला, पार्टी अपना नाम कांग्रेस-माओवादी कर ले

नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि नक्सलियों से रिश्ते रखने के दो आरोपियों के लेटर में दिग्विजय का फोन नंबर मिला। भाजपा नेता संबित पात्र ने कहा कि कांग्रेस के भीतर कुछ लोग हैं, जो नक्सलवाद को बढ़ावा देना चाहते हैं। पार्टी अपना नाम कांग्रेस-माओवादी कर ले। उधर, कांग्रेस नेता दिग्विजय ने भाजपा के आरोपों पर कहा- अगर ऐसा है तो मुझे सरकार गिरफ्तार करे। पहले देशद्रोही, अब नक्सली। इसलिए यहीं से मुझे गिरफ्तार करिए।

संबित पात्र ने कहा- कांग्रेस नक्सलियों को बढ़ावा देना चाहती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सोनिया गांधी और उनके दिमाग से उपजी कांग्रेस की राष्ट्रीय सलाहकार समिति (एनएसी) है। ये समिति नक्सलवाद के समर्थन की बुनियाद है।

 

खत में कांग्रेस की फंडिंग का जिक्र : पात्र ने कहा, "हालिया छापों में सामने आया था कि कॉमरेड सुरेंद्र और प्रकाश के बीच 25 सितंबर 2017 को खत के जरिए बातचीत हुई थी। इस खत में एक लाइन लिखी थी कि कांग्रेस के नेता नक्सलवाद को बढ़ावा देने के इच्छुक हैं। इस प्रक्रिया में वह जब भी विरोध का मौका बने, तब फंडिंग करने के लिए तैयार हैं। खत में लिखा था कि इस संबंध में आप हमारे दोस्त से .... इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। ये फोन नंबर किसी और का नहीं, बल्कि राहुल गांधी के सलाहकार और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का था। दिग्विजय ने अभी तक ये सफाई नहीं दी थी कि ये नंबर उनका नहीं है। ऐसे में उन्होंने ये मान ही लिया है कि नंबर उनका था।"

नक्सलियों के केस लड़ने वाले नागपुर के वकील और माओवादी कार्यकर्ता माने जा रहे सुरेंद्र गडलिंग को 6 जून को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, कॉमरेड प्रकाश माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य है।

 

खत से हुआ था मोदी सरकार के खिलाफ साजिश का खुलासा : भीमा-कोरेगांव हिंसा केस में पिछले महीने महाराष्ट्र पुलिस ने देश के छह शहरों में छापा मारा था। इस दौरान हैदराबाद से वामपंथी कार्यकर्ता-लेखक वरवर राव और छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज के अलावा ठाणे से वेरनन गोंजाल्विस, फरीदाबाद से अरुण फरेरा और दिल्ली से गौतम नवलखा को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। बाद में इनकी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। पुलिस ने कहा था- कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई सही है। प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े ये लोग कानून-व्यवस्था बिगाड़ना चाहते थे। पांचों कार्यकर्ताओं से जुड़े साथी मोदी-राज खत्म करना चाहते थे। 23 अप्रैल को माओवादियों का एक लेटर मिलने के बाद पुणे पुलिस ने जांच शुरू की थी। जांच में खुलासा हुआ कि बहुत बड़ी साजिश रची जा रही थी।

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