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राहुल गांधी के करीबी सैम पित्रोदा ने दी सफाई, उठाया था बालाकोट Air Strike पर सवाल

नई दिल्ली। à¤•ांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी और इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चीफ सैम पित्रोदा ने अपने हाल के ही दिए इंटरव्यू के बाद सफाई दी है। उन्होंने बालाकोट में भारतीय वायुसेना के सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए आतंकियों की संख्या पर सवाल खड़ा किया था। बताते चलें कि पुलवामा हमले का बदला लेने के लिए वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर हमला किया था।

पित्रोदा ने कहा था कि यदि उन्होंने (भारतीय वायुसेना) ने 300 आतंकियों को मारा था, तो यह ठीक है। मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि आप मुझे ज्यादा तथ्य दें और इसे साबित करें। जब उनसे पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वां क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद के कैंप पर की गई एयर स्ट्राइक के बारे में दृष्टिकोण पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एयर स्ट्राइक के बारे में अलग नजरिया है और भारत के लोगों को एयर फोर्स के ऑपरेसन के बारे में तथ्य जानने का अधिकार है।

सैम पित्रोदा ने कहा कि मैं इस बारे में ज्यादा जानना चाहता हूं क्योंकि मैंने न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य समाचार पत्रों की रिपोर्ट्स पढ़ी। क्या हमने सच में हमला किया था? हमने सच में 300 लोगों को मारा था? मैं वह नहीं जानता। एक नागरिक होने के नाते मैं यह जानने का अधिकारी हूं और यदि मैं सवाल करता हूं, तो यह पूछना मेरा कर्तव्य है। इसका यह अर्थ नहीं है कि मैं राष्ट्रभक्त नहीं हूं। इसका यह अर्थ नहीं है कि मैं इस तरफ हूं या उस तरफ।

 

हमें तथ्य जानने चाहिए। यदि आप कहते हैं कि 300 लोगों को मारा गया था, तो मैं वह जानना चाहता हूं। हम सभी को वह जानने की जरूरत है, भारत के लोगों को वह जानने की जरूरत है और इसके बाद वैश्विक मीडिया की बारी आती है, जो कहती है भारतीय एयर स्ट्राइक में कोई नहीं मारा गया। एक भारतीय नागरिक होने के नाते मुझे बुरा लगता है।

पुलवामा हमले पर पित्रोदा ने कहा कि वह हमलों के बारे में ज्यादा नहीं जानते। यह हर समय होते हैं। मुंबई में भी हमला हुआ था और हम तब प्रतिक्रिया दे सकते थे और अपने विमानों को भेज सकते थे, लेकिन यह सही दृष्टिकोण नहीं है। मेरे अनुसार, आप दुनिया के साथ जैसे व्यवहार करते हैं, यह वैसा नहीं है।

सैम पित्रोदा ने कहा कि आठ लोग (26/11 के आतंकवादी) आते हैं और कुछ करते हैं। आप पूरे देश (पाकिस्तान) पर हमला नहीं करते हैं। यह मानना कि सिर्फ इसलिए कि कुछ लोग यहां आए और हमला किया, तो उस राष्ट्र (पाकिस्तान) का हर नागरिक को दोषी ठहराया जाए। मैं उस तरह से विश्वास नहीं करता।

 

 

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