नोटबंदी का 29वां दिन और कैशलेस होता देश, ठप पड़े कारोबार
नई दिलà¥à¤²à¥€à¥¤ केंदà¥à¤° सरकार ने 8 नवंबर को 500 और 1000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के नोटों का चलन बंद कर देश के आम और खास वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को à¤à¤• धरातल पर लाकर खड़ा दिया। नोटबंदी के तीन हफà¥à¤¤à¥‡ गà¥à¤œà¤° चà¥à¤•े हैं, मगर उसके बाद से कोई खास सकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ लोगों के सामने नहीं आया है। लेकिन यहां गौर करने वाली बात है कि नोटबंदी ने देश को कैशलेस लेन-देन की ओर à¤à¤• और कदम बढ़ाने में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ योगदान दिया है।
पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ नरेंदà¥à¤° मोदी के इस फैसले ने देश के हर वरà¥à¤— और कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° को चौंकाया। तीन हफà¥à¤¤à¥‡ के बाद अगर इसे फैसले के नकारातà¥à¤®à¤• पहलà¥à¤“ं पर गौर करें तो इसकी फेहरिसà¥à¤¤ काफी लंबी है। नोटबंदी की घोषणा के बाद देश की 86 फीसदी की नगदी के रातों-रात यूं पानी-पानी हो जाने से पूंजीपति से लेकर आम इंसान à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤†à¥¤ नोटबंदी को तीन हफà¥à¤¤à¥‡ हो चà¥à¤•े हैं, लेकिन इससे होने वाले फायदों की तसà¥à¤µà¥€à¤° अà¤à¥€ à¤à¥€ धà¥à¤‚धली है, जिसका सरकार पहले दिन से दावा कर रही है। हालांकि हम खà¥à¤¦ अंदाजा लगा सकते हैं कि इस तरह की पहल से लोगों के रहन-सहन, खरà¥à¤šà¥‹ में बदलाव आà¤à¤—ा और वह नगदी पर कम आशà¥à¤°à¤¿à¤¤ होंगे।
500 और 1000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ की शकà¥à¤² में देश की मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ के 86 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ को हटाने के नकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ की बात नहीं है। सरकार कर रही है कि इसके बाद हमारा देश सोने की तरह चमकेगा। कई लोगों ने à¤à¥€ सरकार के सà¥à¤° से सà¥à¤° मिलाया है, मगर यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ नहीं हà¥à¤† कि इससे कà¥à¤¯à¤¾ फायदा होगा और वाकई लंबे समय के लिठहोगा। सरकार के इस कथन को लेकर हर कोई आशावादी नहीं हैं। इंडिया सेंटà¥à¤°à¤² पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® ऑफ द इंटरनेशनल गà¥à¤°à¥‹à¤¥ सेंटर के निदेशक पà¥à¤°à¤£à¤µ सेन ने à¤à¤• वेबसाइट आइडियास फॉर इंडिया में लिखा कि विमà¥à¤¦à¥à¤°à¥€à¤•रण से समूचा असंगठित कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ रूप से कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हà¥à¤† है। विशेष रूप से असंगठित वितà¥à¤¤à¥€à¤¯ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° जो बैंक ऋण देने या सकल घरेलू उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ के 26 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° है। यह कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° गांव के किसानों और कम आय वाले लोगों को बचत और ऋण सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤à¤‚ उपलबà¥à¤§ कराते हैं।
देश की अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में 50 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से अधिक का योगदान करने वाले असंगठित या अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के लोगों का कà¥à¤² कामगार आबादी में हिसà¥à¤¸à¤¾ 80 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ है, जो कई तरà¥à¤•ों के हिसाब से बà¥à¤°à¥€ तरह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤† है। सरकार के 500 और 1,000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के नोट को अमानà¥à¤¯ करने से वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° और अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ à¤à¥€ बà¥à¤°à¥€ तरह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤†à¥¤ खà¥à¤¦ पशà¥à¤šà¤¿à¤® बंगाल के वितà¥à¤¤à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ अमित मितà¥à¤°à¤¾ ने 30 दिसंबर तक अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को 1.28 लाख करोड़ रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ का नà¥à¤•सान होने की बात कही।
खैर, यह तो रही देश की बात, नोटबंदी का असर पूछना है कि छोटे वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से पूछें, जिनके पास कालाधन न होते हà¥à¤ à¤à¥€ खामियाजा à¤à¥à¤—तना पड़ा। राजधानी दिलà¥à¤²à¥€ के करोल बाग पर सजावटी सामान और उपहार के विकà¥à¤°à¥‡à¤¤à¤¾ रविंदà¥à¤° जैन ने बताया कि नोटबंदी ने हमें इतना बेबस कर दिया गया है कि हम दà¥à¤•ान का किराया नहीं दे पा रहे हैं। इस सीजन में बहà¥à¤¤ अधिक बिकà¥à¤°à¥€ होती थी, वहीं अब बाजार ठंडा पड़ा है।
हम दà¥à¤•ान खाली करने को मजबूर हैं। नोटबंदी के बाद बैंकों और à¤à¤Ÿà¥€à¤à¤® पर उमड़ी à¤à¥€à¤¡à¤¼ ने नोटबंदी की तैयारी पर पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ चिनà¥à¤¹ उठाया। इस फैसले के लिठसमूची तैयारियों की जरूरत थी, जो नदराद रहीं। वहीं इस बीच जिन लोगों के पास 500 और 1000 के अधिक संखà¥à¤¯à¤¾ में जायज नोट à¤à¥€ हैं, वह à¤à¥€ बैंकों की à¤à¥€à¤¡à¤¼ के डर से अपनी मेहनत की कमाई को जाया होते देख रहे हैं।
नोटबंदी के इस दौर में कई लोगों ने तो अपनी जानें à¤à¥€ गवाई हैं। आकंड़ो के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, नोटबंदी के बाद से 65 से अधिक लोगों की मौत हà¥à¤ˆà¥¤ इसके अलावा नगदी की कमी से वह कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤, जिनसे सबसे अधिक लोगों का रोजगार जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† था। नोटबंद के साथ ही नोटों को बदलने व निकालने की सीमा, बैंकों में उमड़ी à¤à¥€à¤¡à¤¼ और à¤à¤Ÿà¥€à¤à¤® की अधूरी वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं ने लोगों को खीजने पर मजबूर कर दिया। वहीं, बैंकों से जैसे-तैसे पैसा निकाल कर लाठलोग उस समय खà¥à¤¦ को ठगा सा महसूस करने लगे जब बाजार में दà¥à¤•ानदारों ने 2,000 हजार का छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ देने से मना कर दिया।
सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बड़े नोटों को हटाकर उससे à¤à¥€ बड़ा 2,000 का नोट बाजार में उतारना किसी को हजम नहीं हà¥à¤†à¥¤ यहां तक आंधà¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में à¤à¤• मजदूर ने 2000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के नोट का छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ न मिल पाने के कारण आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ की कोशिश तक कर डाली। नोटबंदी से देश के तमाम राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जैसे यूपी, उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤–ंड, बिहार à¤à¤¾à¤°à¤–ंड में रबी की फसलों की बà¥à¤µà¤¾à¤ˆ धीमी हो गई। गेंहू, तरबूज, सरसों, पालक समेत बीजों की बिकà¥à¤°à¥€ छोटे नोट की कमी से वजह से 70 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆà¥¤
सरकार के इस फैसले का लोगों में हालांकि बढ़-चढ़ कर समरà¥à¤¥à¤¨ à¤à¥€ देखने को मिला। कई लोग इस बात से खà¥à¤¶ दिखे कि जिसके पास बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में कालाधन है उनके नोट पूरी तरह से रदà¥à¤¦à¥€ हो जाà¤à¤‚गे। इस डर से काले धन रखने वालों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नोटों की बोरियां जलाने, गंगा में बहाने और दान करने जैसी खबरों ने खूब सà¥à¤–ियां बटोरीं। तीन हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के हिसाब से अगर गणना की जाठतो विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पड़ने वाला नोटबंदी का नकारातà¥à¤®à¤• असर विकास दर को काफी नीचे ले जा सकता है। अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाठजा रहे हैं कि विकास दर 3.5 से 6.5 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ तक नीचे रहेगी, हालांकि यह बहà¥à¤¤ हद कर निवेश के रà¥à¤– पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करता है। नोटबंदी à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤° को खतà¥à¤® करने की छोटी सी रणनीति हो सकती है लेकिन इससे आम आदमी को बहà¥à¤¤ अधिक परेशानी उठानी पड़ी है।
मà¥à¤‚बई सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ इकà¥à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ अनà¥à¤¸à¤‚धान फरà¥à¤® à¤à¤‚बिट कैपिटल के आकंड़ों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, नोटबंदी के कारण वितà¥à¤¤ वरà¥à¤· 2016-17 की दूसरी छमाही में जीडीपी विकास दर 0.5 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ गिरने का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ है। इसका मतलब यह है सकल घरेलू उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ की वृदà¥à¤§à¤¿ दर अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 2016 से मारà¥à¤š 2017 तक 0.5 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ नीचे जा सकती है। बात अगर काले धन की जाठतो कà¥à¤¯à¤¾ वाकई नोटबंदी कालेधन पर चोट करेगी। कालेधन को खतà¥à¤® करने के लिठबेनामी संपितà¥à¤¤ और विदेशी बैंकों में जमा धन à¤à¥€ निशाने पर हैं। यहां पर नोटबंदी का निशाना केवल वह काला धन है जिसे लोगों ने नगदी के रूप में सहेज के रखा है।
नोटबंदी के लंबी अवधि के फायदे को बाद में आà¤à¤‚गे लेकिन नोटबंदी के ठीक बाद हमारे सामने सबसे बड़ा उदाहरण कैशलैस लेनदेन रहा। नोटबंदी के ठीक बाद देश के उन पढ़े-लिखे लोगों के बीच कà¥à¤°à¥‡à¤¡à¤¿à¤Ÿ-डेबिट और पेटीà¤à¤® जैसे माधà¥à¤¯à¤®à¥‹à¤‚ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² बढ़ गया, जो इनका कम ही इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करते थे या फिर बिलà¥à¤•à¥à¤² नहीं करते थे। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में ई-कॉमरà¥à¤¸ का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° सालाना 51 फीसदी के दर से हो रहा है। वहीं, नोटबंदी के बाद छोटे-बड़े सà¤à¥€ लोगों के बीच दूध, सबà¥à¤œà¥€, अंडे और मोबाइल रिचारà¥à¤œ जैसे कामों के लिठकैशलैस à¤à¥à¤—तान का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² बढ़ा। अगर इस पर गौर किया जाठतो वाकई इससे हमारे देश ने कैशलैस कà¥à¤°à¤¾à¤‚ति की ओर à¤à¤• और कदम बढ़ाया है, जिसमें केवल बड़े शहरों का पढ़ा-लिखा वरà¥à¤— ही नहीं बलà¥à¤•ि छोटे शहरों का मधà¥à¤¯à¤® वरà¥à¤— à¤à¥€ शामिल रहा।