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UAPA Bill: लोकसभा में UAPA संशोधन बिल पास, NIA को मिलेंगे ज्यादा अधिकार

नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को भारी हंगामे के बीच गैरकानूनी गतिविधियां(रोकथाम) संशोधन विधेयक 2019 (UAPA)पारित हो गया। इस बिल को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग की और इसका विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया। बिल पर चर्चा के दौरान जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद बंदूक से पैदा नहीं होता, आतंकवाद के लिए उन्माद फैलाया जाता है। सरकार का कहना है कि इस बिल से राष्ट्रीय जांच एजेंसी(NIA) को और ताकत मिलेगी। वहीं विपक्ष का कहना है कि इस बिल का दुरुपयोग होगा।एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा ' मैं इसके लिए कांग्रेस पार्टी को दोषी मानता हूं। इस कानून को लाने के लिए वे मुख्य दोषी हैं। जब वे सत्ता में होते हैं तो वे भाजपा के बड़े भाई बनते हैं और जब वे सत्ता खो देते हैं तो मुसलमानों के बड़े भाई बन जाते हैं। जब कोई कांग्रेसी गिरफ्तार होगा तब उन्हें इस बात का पता चलेगा।' ओवैसी ने भाजपा सरकार को भी हुआ और कहा कि इस विधेयक से अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन होगा। किसी को भी केवल सरकार की भावना या संदेह के आधार पर आतंकवादी नहीं कहा जा सकता है। इस बिल में न्यायिक समीक्षा का पूरी तरह अभाव है और मैं जानना चाहता हूं कि संसदीय संप्रभुता कहां जा रही है ?सदन में जवाब देते हुए अमित शाह ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा उन्होंने कहा कि जब आप हम लोगों पर सवाल खड़े करते हैं तो यह नहीं देखते हैं इस बिल को लेकर कौन आया था। इस बिल के प्रावधानों को किसने और सख्त किया। हकीकत यह है कि जब आपलोग सरकार में थे तो इस बिल को लाया गया। उस समय आप लोगों ने इस बिल के संबंध में जो कुछ किया वो भी सही था और आज जब हम इस विषय पर आगे बढ़ रहे हैं वो भी सही है। शाह ने कहा कि देश के सामने कई खतरे है। क्या आप लोग इसे नहीं देख रहे हैं।

क्या है यूएपीए एक्ट

यूएपीए एक्ट का उद्देश्य देश की अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ होने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। इस विधेयक के अनुसार, सरकार किसी संगठन को पहली अनुसूची में शामिल कर आतंकी संगठन घोषित कर सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान यह कानून लाया गया था। इसमें संशोधन कर एक्ट में चौथी अनुसूची जोड़ी गई है। इसके तहत व्यक्तियों के नाम भी इसमें शामिल किए जा सकेंगे।

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