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अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती पर भड़कीं महबूबा, एडीजीपी ने दी यह सफाई

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में इस खबर को लेकर भारी हलचल है कि केंद्र सरकार ने अर्द्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियां तैनात करने का आदेश दिया है। कुछ लोग इसे प्रदेश में धारा 35ए भंग करने से पहले की तैयारी बता रहे हैं। इस बीच,राज्य पुलिस में सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था विग के अतिरिक्त महानिदेशक मुनीर अहमद खान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अर्द्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियां नहीं भेजी जा रहीं, बल्कि यह पहले से तैनात उन केंद्रीय अर्धसैनिकबलों का स्थान लेंगी, जिन्हें बीते साल प्रशिक्षण के दौरान ही देश के विभिन्न हिस्सों से जम्मू-कश्मीर में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों के दौरान यहां भेजा गया था। इन कंपनियों की तैनाती को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। उनसे सावधान रहने की जरूरत है।

इस बीच, पीडीपी प्रमुख मेहबूबा मुफ्ती ने कहा है कि केंद्र सरकार के इस फैसले से घाटी के लोगों में खौफ का माहौल है। उन्होंने दोहराया कि कश्मीर एक 'राजनीतिक समस्या' है, जिसे सैन्य तरीकों से हल नहीं किया जा सकता।इस समय पूरी वादी में विभिन्न अर्द्धसैनिक बलों की 200 ट्रेनिग कंपनियां तैनात हैं। यह कंपनियां बीते साल पंचायत और निकाय चुनावों के लिए तैनात की गई थीं। इससे पहले कि यह कंपनियां वापस लौटतीं, लोकसभा चुनाव शुरू हो गए। इस बीच पुलवामा हमला भी हुआ और उसके बाद जो स्थिति रही वह भी सभी जानते हैं। चुनाव के पूरा होने के साथ ही श्री अमरनाथ यात्रा शुरू हो गई।'

'अब जो 100 कंपनियां यहां आ रही हैं, वे पूरी तरह प्रशिक्षित हैं। ऐसे में पुरानी 100 कंपनियों को हटाकर नई कंपनियां उनकी जगह लेंगी। जब यह प्रक्रिया पूरी होगी तो शेष बची 100 अन्य ट्रेनिग कंपनियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।'

'आतंकरोधी अभियानों के लिए यहां सुरक्षाबलों की मौजूदगी पहले से ही पर्याप्त है। वहीं, कुछ लोग जानबूझकर अनुच्छेद 35ए को भंग किए जाने की अफवाह फैलाते हुए इन कंपनियों के आगमन को लेकर लोगों के मन में डर पैदा कर रहे हैं। ये तत्व यहां हालात बिगाड़ना चाहते हैं। इन तत्वों से सावधान रहने की जरूरत है।'

अमित शाह की बैठक में उठा था मुद्दा

बता दें, गत माह कश्मीर घाटी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक में राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने केंद्रीय गृहमंत्रालय से आतंकरोधी अभियानों और कानून व्यवस्था की स्थिति के लिए 100 अतिरिक्त कंपनियों की मांग की थी। संबंधित अधिकारियों ने कहा था कि राज्य में बीते साल भेजे गए अर्धसैनिक बल के जवान आतंकरोधी अभियानों और कानून व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं हैं, क्योंकि वे विभिन्न ट्रेनिग सेंटरों से राज्य में पंचायत और निकाय चुनाव ड्यूटी के लिए भेजे गए थे। केंद्रीय गृहमंत्री ने राज्य प्रशासन के इस आग्रह को स्वीकार किया था। इसके आधार पर दो दिन पहले केंद्रीय गृहमंत्रालय ने राज्य में केंद्रीय अर्धसैनिकबलों की 100 कंपनियां भेजने का फैसला किया।

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