Homeदेश विदेश ,प्रमुख खबरे,slider news,
नए नियम तक कर्मचारियों को संपत्ति की घोषणा करना जरूरी नहीं: केंद्र

केंद्र सरकार के कर्मचारियों जिन्हें लोकपाल अधिनियम के तहत 31 दिसंबर तक अपनी संपत्तियों और देनदारियों की घोषणा करनी थी, उन्हें फिलहाल इसकी घोषणा करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सरकार नए नियमों को अंतिम रूप दे रही है। कोई भी तारीख बताए बिना एक कायार्लय ज्ञापन में कहा गया है कि नियमों को आने वाले समय में अधिसूचित किया जाएगा जिसमें आने वाले समय में लोकपाल अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के तहत संपत्ति और देनदारियों को दाखिल करने के लिए फॉर्म, तरीके और समय-सीमा को बताया जाएगा।

इस साल जुलाई में केंद्र सरकार के कर्मचारियों से कहा गया था कि वे लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम की धारा 44 के तहत 31 दिसंबर तक अपनी संपत्ति और देनदारियों की घोषणा करें। इसके अलावा लोकसेवकों को यह भी निदेर्श दिया गया था कि वे 31 मार्च 2015 या इस साल 31 दिसंबर तक अपनी संपत्तियों और देनदारियों के वार्षिक रिटर्न की घोषणा करें। अब कायार्लय ज्ञापन में केंद्र ने साफ तौर पर कहा है कि फिलहाल संपत्तियों और देनदारियों की घोषणा दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

कायार्लय ज्ञापन में कहा गया है, लोकसेवकों द्वारा अब संपत्ति की घोषणा और देनदारियों को दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार नए नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। केंद्र ने कहा, इस संबंध में यह कहा जाता है कि लोकपाल एवं लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम, 2016 पारित किए जाने के साथ लोकसेवक (सूचना एवं संपत्ति एवं देनदारियों की वार्षिक योजना और रिटर्न दाखिल करने में संपत्तियों में छूट की सीमा) नियम, 2014 और उसके बाद किए गए सारे संशोधन महत्वहीन हो जाते हैं।

लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम के तहत कर्मचारियों को विदेशी बैंक खातों में जमा, खचीर्ले पेंटिंग, पुरातन वस्तुओं, फनीर्चर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, चल संपत्तियों, बीमा, बांड, शेयर और म्यूचुअल फंड समेत अन्य का घोषणा पत्र में विवरण देना होता है। इस अधिनियम के तहत घोषणा कर्मचारियों द्वारा विभिन्न सेवा नियमों के तहत दायर किए जाने वाले इसी तरह की घोषणा के अतिरिक्त हैं। देश में फिलहाल केंद्र सरकार के तकरीबन 50 लाख कर्मचारी हैं।

Share This News :