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सूर्य ग्रहण , नहीं मान्य होगा सूतक काल

साल का पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल को लग रहा है। हालांकि यह भारत में नहीं दिखाई देगा जिसके कारण इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। सूतक काल न होने से इस दौरान सभी शुभ कार्य किए जा सकेंगे। इस दिन बैशाख कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या शनिश्चरी अमावस्या कहलाती है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि सूर्य ग्रहण शनिवार को देर रात 12:15 से शुरू होगा। भोर में 4:07 बजे समाप्त होगा।

इससे पहले बीते वर्ष चार दिसम्बर को सूर्य ग्रहण लगा था। तब भी सूतक काल मान्य नहीं था।

नववर्ष का यह पहला ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा क्योंकि यह खगोलीय घटना देश में सूर्योदय से पहले होगी। गुप्त ने बताया कि 16 मई को लगने वाला पूर्ण चंद्रग्रहण भी भारत में नहीं देखा जा सकेगा क्योंकि इस दौरान देश के आकाश में सुबह का सूरज जगमगा रहा होगा। उन्होंने बताया कि 25 अक्तूबर को लगने वाले आंशिक सूर्यग्रहण का नजारा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वोत्तर के क्षेत्रों को छोड़कर शेष भारत में निहारा जा सकेगा। गुप्त ने बताया कि इस खगोलीय घटना के वक्त सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा कुछ इस तरह आ जाएगा कि पृथ्वीवासियों को सूर्य 63.2 प्रतिशत ढंका नजर आएगा।8 नवंबर को लगने वाले पूर्ण चंद्रग्रहण को भारत के उन इलाकों में अच्छी तरह देखा जा सकेगा जहां चंद्रोदय देश के दूसरे इलाकों के मुकाबले जल्दी होता है। पूर्ण चंद्रग्रहण तब लगता है, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और अपने उपग्रह चंद्रमा को अपनी छाया से ढंक लेती है। चंद्रमा इस स्थिति में पृथ्वी की ओट में पूरी तरह छिप जाता है और उस पर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ पाती है। इस खगोलीय घटना के वक्त पृथ्वीवासियों को कभी-कभार चंद्रमा रक्तिम आभा लिए दिखाई देता है जिसे ‘ब्लड मून भी कहा जाता है।

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