शनिदेव क्यों रहते हैं पिता सूर्यदेव से नाराज, पौराणिक कथा से जानें शनिदेव की टेढ़ी नजर का कारण
शनिदेव का नाम आते ही कुछ लोग भयभीत हो जाते हैं। लोगों का मानना है कि शनिदेव क्रोधी स्वबाव के हैं और अशुभ फल प्रदान करते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्यायदेवता माना गया है। शनि सेवा व कर्म के कारक है। कहते हैं कि शनिदेव हर जातक को उसके कर्मों के हिसाब से फल प्रदान करते हैं। जानें शनिदेव से जुड़ी पौराणिक कथाएं-
शनिदेव के काले रंग को देखकर सूर्यदेव ने पत्नी छाया पर संदेह किया और उन्हें अपमानित करते हुए कह दिया कि यह मेरा पुत्र नहीं हो सकता। मां के तप की शक्ति शनिदेव में भी आ गई थी और उन्होंने क्रोधित होकर अपने पिता सूर्यदेव की ओर देखा तो सूर्यदेव बिल्कुल काले हो गए, उनके घोड़ों की चाल रूक गई। परेशान होकर सूर्यदेव को भगवान शंकर की शरण लेनी पड़ी। इसके बाद भगवान शिव ने सूर्यदेव को उनकी गलती का अहसास कराया। सूर्यदेव ने अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। जिसके बाद फिर से उन्हें असली रूप वापस मिला। लेकिन पिता पुत्र का संबंध जो एक बार खराब हुआ वह आज तक नहीं सुधरा। शनिदेव को अपने पिता सूर्य का विद्रोही माना जाता है।