आज से शुरू हुआ होलाष्टक, नवग्रह हुए उग्र, संकट को दूर करने करें ये काम
सोमवार से होलाष्टक शुरू हो गया है, जो 7 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। वैसे तो होलाष्टक आठ दिनों के होते हैं, लेकिन इस बार 9 दिनों के पड़ रहे हैं। फाल्गुन मास के शुल्क पक्ष की अष्टमी तिथि के साथ होलाष्टक का आरंभ हुआ। यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के साथ समाप्त होगा। इन नौ दिनों में किसी भी तरह के शुभ काम करने का मनाही है। शास्त्रों के अनुसार, श्रीहरि के परम भक्त प्रहलाद को मारने के लिए उनके पिता हिरण्यकश्यप ने कई यातनाएं दी थी। इसी कारण इस दौरान मांगलिक कार्य निषेध होते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक के दौरान नवग्रह उग्र और अशांत होते हैं। ऐसे में 12 राशियों पर प्रभाव पड़ता है। इस दौरान कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए। यदि आप चाहते हैं कि नवग्रह के नकारात्मक प्रभाव आपके ऊपर न पड़ें। ऐसे में आप नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र
ग्रहाणामादिरात्यो लोकरक्षणकारक:।
विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे रवि:।।
रोहिणीश: सुधामूर्ति: सुधागात्र: सुधाशन:।
विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे विधु:।।
भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा।
वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीडां हरतु में कुज:।।
उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति:।
सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीडां हरतु मे बुध:।।
देवमन्त्री विशालाक्ष: सदा लोकहिते रत:।
अनेकशिष्यसम्पूर्ण: पीडां हरतु मे गुरु:।।
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामति:।
प्रभु: ताराग्रहाणां च पीडां हरतु मे भृगु:।।
सूर्यपुत्रो दीर्घदेहा विशालाक्ष: शिवप्रिय:।
मन्दचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि:।।
अनेकरूपवर्णेश्च शतशोऽथ सहस्त्रदृक्।
उत्पातरूपो जगतां पीडां हरतु मे तम:।।
महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबल:।