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मुलायम-अखिलेश की बैठक खत्म, सुलह की ओर बढ़ा पार्टी में मचा घमासान

यूपी की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में जारी सियासी घमासान के बाद तस्वीर काफी हद साफ होती दिखी और अब यहां सुलह की कोशिशें शुरू हो गई है. दरअसल पार्टी पर वर्चस्व को लेकर इस लड़ाई में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पिता एवं पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह और चाचा शिवपाल पर भाड़ी पड़ते दिखे. शनिवार को हुए एक तरह के शक्तिपरीक्षण में अखिलेश का सपा पर दबदबा साफ दिखा. इस बीच सपा की आधिकारिक वेबसाइट से अखिलेश विरोधी शिवपाल यादव की तस्वीर के साथ-साथ अखिलेश और रामगोपाल यादव के निष्कासन की चिट्ठी भी हटा ली गई है.

इससे पहले सीएम अखिलेश अपने पिता एवं पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह से मिलने उनके घर पहुंचे हैं. पिता-पुत्र की इस मुलाकात में वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की अहम भूमिका मानी जा रही है. बताया जा रहा है कि उन्होंने ही पहले पिता मुलायम और फिर अखिलेश से मुलाकात कर बीचबचाव की कोशिश की. अखिलेश जिस गाड़ी से मुलायम सिंह के घर पहुंचे, उसमें भी अखिलेश के साथ आजम खान और अबु आजमी मौजूद थे.

अखिलेश ने यहां पिता के सामने सुलह के लिए अमर सिंह को पार्टी से निकालने की शर्त रखी और 12 सितंबर से पहले के हालात बहाल करने की मांग की है. दरअसल तभी से अखिलेश की चाचा शिवपाल के बीच खुली रस्साकशी शुरू हुई थी. अखिलेश यादव की इन शर्तों के बाद मुलायम सिंह ने अपने भाई एवं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को फोन कर अपने घर बुलाया है. इसके बाद मुलायम के घर थोड़ी देर बातचीत के बाद यह बैठक खत्म हो गई.

मुलायम ने कर दी भूल : सपा विधायक
दरअसल सपा में जारी ताकत की इस लड़ाई में पिता मुलायम अपने बेटे अखिलेश के सामने कमजोर साबित होते दिख रहे हैं. सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह ने पार्टी दफ्तर में शनिवार 10.30 बजे संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई थी, लेकिन वह मीटिंग शुरू ही नहीं हो सकी. मुलायम सिंह जिस पार्टी को अपनी और सिर्फ अपनी पार्टी कह रहे थे, वह भी उनसे मुंह मोड़ती दिखी और पार्टी दफ्तर के आगे सन्नाटा सा ही पसरा रहा. पार्टी दफ्तर में सुरक्षा अधिकारियों को 402 लोगों की लिस्ट दी गई थी, लेकिन 12 बजे तक बमुश्किल 100 लोग ही यहां पंहुचे. उसमें भी संगठन के लोग ज्यादा थे, विधायक और प्रत्याशी कम. बैठक के लिए पार्टी दफ्तर पहुंचने वालों में महज 18 मंत्री और विधायक, तो करीब 60 से ज्यादा प्रत्याशी शामिल थे. यहां देखने वाली बात यह है कि मुलायम द्वारा घोषित 395 प्रत्याशियों में से एक चौथाई भी मुलायम का साथ नहीं दिखे. वहीं अब तक जो विधायक और प्रत्याशी पार्टी दफ्तर पंहुचे भी, उनमें से ज्यादातर मुलायम सिंह को ही नसीहत देते दिखे. मुलायम कैंप के ऐसे ही एक विधायक बाबू खान का कहना है कि मुलायम सिंह ने भूल कर दी.

विधानसभा जीत कर पिता मुलायम को गिफ्ट देंगे अखिलेश
इससे पहले सीएम आवास पर अपने समर्थक विधायकों के साथ मीटिंग कर रहे अखिलेश ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि वह अपने पिता से अलग नहीं है. अब वह पिता मुलायम सिंह को विधानसभा जीत कर गिफ्ट देंगे. सीएम आवास पर हुई इस बैठक में शामिल होने के लिए सपा से निष्कासित रामगोपाल यादव और धर्मेंद्र यादव भी पहुंचे हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि अखिलेश इस बैठक में सपा का दामन छोड़ अपनी अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर सकते हैं. अखिलेश समर्थकों का दावा है कि इस बैठक के लिए अब तक 210 से 220 एमएलए व एमएससी पहुंच चुके हैं और यह संख्या अभी बढ़ने की उम्मीद है. इस बैठक में शामिल विधायकों से हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं और उनके मोबाइल फोन बाहर ही रख लिए जा रहे हैं.

इस बीच रामगोपाल यादव ने रविवार 1 जनवरी को लखनऊ स्थित आरएमएल लॉ यूनिवर्सिटी में सपा कार्यकर्ताओं की जो आपात बैठक बुलाई थी, उसमें शनिवार को अचानक बदलाव किया गया. बदले हुए कार्यक्रम के तहत अब यह बैठक जनेश्वर मिश्र पार्क में होगी, जो कि काफी बड़े आकार है और   

मुलायम की मीटिंग में 55 विधायकों के पहुंचने का दावा
वहीं दूसरी तरफ सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने भी पार्टी दफ्तार में राज्य संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई है. मुलायम समर्थकों ने इस बैठक के लिए 55 विधायकों के पार्टी दफ्तर पहुंचने का दावा किया है. इस बैठक में शिवपाल यादव के अलावा कमाल यूसुफ, मधुकर जेटली, अशोक वाजपेयी, नारद राय और राजकिशोर सिंह जैसे अहम चेहरे शामिल हुए हैं. वहीं संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद मुलायम पार्टी के मौजूदा विधायकों और उम्मीदवारों के साथ मीटिंग करेंगे.

इस बीच अखिलेश समर्थकों ने मुलायम सिंह के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में पार्टी दफ्तर पर कब्जा कर लिया है. इसके अलावा कई जिलों में भी अखिलेश समर्थक नारेबाजी कर रहे हैं. वहीं कुछ अखिलेश समर्थक नारेबाजी करते हुए लखनऊ में सपा दफ्तर की तरफ पहुंच गए. हालांकि पुलिस ने उनके रास्ते में रोक लिया और इस वजह से पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई.

अखिलेश को कांग्रेस और आरएलडी का समर्थन
सपा में दो-फाड़ के बीच पिता-पुत्र की अलग-अलग बुलाई इस बैठक को शक्ति परिक्षण के तौर पर देखा जा रहा है और इन बैठकों में शामिल नेताओं की संख्या ही यूपी में आगे की राजनीतिक बिसात तय करेगी. बता दें कि यूपी विधानसभा में सपा के पास कुल 229 विधायर और 100 सदस्यीय विधानपरिषद में सपा के 67 सदस्य हैं.

यहां अखिलेश अगर अपनी अलग पार्टी का ऐलान करते हैं, तो गेंद राज्यपाल के पाले में चली जाएगी कि वह विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए कहेंगे. अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस, आरएलडी और कुछ निर्दलीय विधायक सीएम अखिलेश यादव का समर्थन करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश और मुलायम की ओर से बुलाई गई विधायकों की बैठक पर कांग्रेस पैनी नजर है. कांग्रेस यह देख रही कि अखिलेश के साथ कितने विधायक हैं.

राहुल, अखिलेश और जयंत की बनी तिकड़ी
अब सपा में मुलायम सिंह, कांग्रेस में सोनिया गांधी और आरएलडी में अजीत सिंह नहीं बल्कि अखिलेश, राहुल और जयंत फैसले ले रहे हैं. बताया जाता है कि तीनों आपस में संपर्क में हैं. राहुल और जयंत ने अखिलेश को सपोर्ट करने का भरोसा दिया है. जयंत ने राहुल से बात करने के बाद अखिलेश को संदेश दिया कि हम सब साथ हैं.

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