शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का बड़ा बयान, बोले- गंगा स्नान से रोका तो टकराव स्वाभाविक
उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य और सरकार के बीच चल रहे विवाद की गूंज अब मध्यप्रदेश तक पहुंच गई है। छिंदवाड़ा प्रवास पर आए जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राजनीति का संचालन धर्म से होना चाहिए। जब राजनीति अनियंत्रित हो जाती है, तब ऐसे विवाद और टकराव सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि नीति शब्द का अर्थ ही धर्म है। धर्म के बिना राजनीति नहीं हो सकती। जो शासक नीति-पूर्वक राज्य करता है, वही सफल होता है।उत्तर प्रदेश में गंगा स्नान को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि यदि किसी को गंगा स्नान से रोका जाएगा तो टकराव स्वाभाविक है। आस्था के विषयों में प्रशासनिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। धार्मिक परंपराओं का सम्मान होना चाहिए। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी द्वारा शंकराचार्य पर दादागिरी के आरोप को लेकर स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि सिद्धांतों का पालन करना दादागिरी नहीं है। धर्म की रक्षा करना संत समाज का परम कर्तव्य है।
जबलपुर में हालिया तनाव को लेकर उन्होंने कहा कि जो लोग इस देश में रहकर, यहीं की शिक्षा लेकर भी देशहित के विरुद्ध कार्य करते हैं, यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति निष्ठा सर्वोपरि होनी चाहिए। भोपाल में एक मुस्लिम विधायक द्वारा गौ-हत्या रोकने के लिए कानून बनाने की मांग पर शंकराचार्य ने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा कि यह स्वागत योग्य पहल है। उन्होंने कहा कि गौ-हत्या रोकने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए और यह सामाजिक जिम्मेदारी है।
यूजीसी कानून पर उठाए सवाल
यूजीसी कानून को लेकर उन्होंने कहा कि पहले से ही एससी-एसटी एक्ट विद्यमान है, जिसमें अपमान करने पर सजा का प्रावधान है। ऐसे में नए कानून लाना न्यायसंगत नहीं है। उनका कहना था कि इस प्रकार के नियमों से समाज में वर्गों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने यूजीसी में प्रस्तावित संशोधन को पूरी तरह वापस लेने की मांग की।
‘सवर्ण और पिछड़े वर्ग के बीच टकराव का माहौल’
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नए प्रावधान समाज को बांटने का कार्य कर सकते हैं। यदि सरकार इस तरह के नियम बनाएगी तो दूसरे समाज के लोग स्वयं को अपराधी घोषित समझने लगेंगे, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित होगा। अंत में शंकराचार्य ने कहा कि समाज में धार्मिक मूल्यों की रक्षा और गौ-संरक्षण के लिए सभी हिंदुओं को एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए। उनके बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।