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ग्वालियर चंबल संभाग : कद्दावर नेताओं का गढ़ , भरे पड़ें है यह धुरंधर

कद्दावर नेताओं का गढ़, सियासी क्षत्रपों का कर्मक्षेत्र है मध्य प्रदेश का ग्वालियर-चंबल इलाका. विधानसभा चुनाव में इलाके की जनता जब जिस ओर झुकी, उसने सत्ता पाई; जब जनता ने किनारा किया, तब सत्ताधारी विपक्ष में बैठे नजर आए. मप्र चुनावों से पहले आइए एक नजर डालते हैं ग्वालियर चंबल संभाग के राजनीतिक समीकरणों पर...!भोपाल. मध्य प्रदेश के उत्तरी भूभाग में पांच जिलों को मिलाकर ग्वालियर संभाग बनता है. ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना और अशोकनगर पांच जिलों के 21 विधानसभा क्षेत्र इस संभाग में हैं. हर जिले में एक सीट अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित है. प्रदेश की सियासत के हिसाब से यह कद्दावर नेताओं का गढ़ रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया जैसे दिग्गज इस क्षेत्र से देश की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे तो वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे राजनीति के धुरंधर ग्वालियर संभाग से आते हैं. वर्ष 2018 में मप्र में कांग्रेस की सरकार बनाने में ग्वालियर का बड़ा योगदान था तो वर्ष 2020 में मप्र की सत्ता की करवट बदलने में ज्योतिरादित्य सिंधिया और इसी ग्वालियर-चंबल संभाग की अहम भूमिका रही.वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में मप्र में कांग्रेस की सरकार बनी. कमलनाथ मुख्यमंत्री बने. इस चुनाव में ग्वालियर संभाग के वोटर्स ने कांग्रेस का खुलकर साथ दिया. संभाग की 21 सीटों में से 16 कांग्रेस ने जीती जबकि भाजपा को 5 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा को भी भितरवार से लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा. अंचल से विजेता रहे प्रद्युम्न सिंह तोमर, जयवर्धन सिंह, इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया को कमलनाथ मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व भी मिला.

मार्च 2020 की उथल-पुथल का असर

कांग्रेस सरकार से नाराज से चल रहे विधायकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में इस्तीफे दे दिए. इनमें ग्वालियर संभाग के 9 विधायक शामिल थे. कांग्रेस के साथ छोड़कर भाजपा में गए विधायकों ने इस्तीफे दिए तो नवंबर 2020 में जिन 28 सीटों पर उपचुनाव हुए, उनमें ग्वालियर जिले की 3 सीट ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व और डबरा शामिल थीं. इसके साथ ही दतिया जिले की भांडेर, शिवपुरी जिले की 2 करैरा और पोहरी, गुना जिले की बमोरी और अशोकनगर जिले की 2 अशोकनगर व मुंगावली सीट पर उपचुनाव हुए.

उपचुनाव में भाजपा ने जीत ली छह सीटें

वर्ष 2018 के चुनाव में ग्वालियर संभाग में कांग्रेस ने 16 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन वर्ष 2020 के उपचुनाव में भाजपा ने 6 सीटें और जीतकर बाजी पलट दी. इस तरह कांग्रेस के पास 10 और भाजपा के पास 11 सीटें हो गईं. तीन सीटों डबरा, ग्वालियर पूर्व और करैरा में कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखा. कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुईं पूर्व मंत्री डबरा विधायक इमरती देवी, ग्वालियर पूर्व के विधायक मुन्नालाल गोयल और करैरा के विधायक जसमंत जाटव को हार कर घर बैठना पड़ा. इसके अलावा अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित भांडेर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया सिर्फ 161 वोटों से हारे.

 

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