श्रीकृष्ण का नाम ही आनंद व उत्सव का प्रतीक : आचार्य गौरदास
ग्वालियर । भगवान श्रीकृष्ण की हर बात कोई न कोई संदेश देने वाली है। सुख दुख जीवन का हिस्सा है लेकिन कुछ लोग आत्मज्ञान प्राप्त कर इससे ऊपर आनन्द की स्थिति में पहुँच जाते हैं। आनन्द से ऊपर की स्थिति परमानन्द की होती है ,जो भगवान की शरण में जाने से ही प्राप्त होती है। हंसते हुये प्राकट्य होने वाले श्रीकृष्ण का नाम ही आनन्द का है।
भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जीने की हर कला सीख सकते हैं।
यह विचार प्राचीन महादेव मंदिर, गिरगांव में पटेल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में श्रीधाम वृदांवन से पधारे भगवताचार्य गौरदास महाराज ने वयक्त किये।
आचार्य गौरदास महाराज ने कान्हा के नामकरण संस्कार की चर्चा करते हुए कहा कि बच्चों का नाम ऐसा हो जो निरर्थक होने की बजाये सार्थक हो। आजकल चिंटू डिम्पू जैसे कई नाम होते हैं जिनका कोई अर्थ नहीं जानता बच्चों के नाम परमात्मा के नाम पर रखे जाना चाहिए उनका नाम लेने पर परमात्मा का नाम जुबान पर आयेगा बेटियों के नाम देवियों के नाम पर रखने चाहिए जैसा नाम हो वैसे गुण भी होने चाहिए।
कथा की आरती में परीक्षित चौधरी सुल्तान सिंह एवं श्रीमती गुड्डी, चौधरी अतर सिंह, धर्मवीर सिंह गुर्जर, अशोक जैन, महेंद्र सिंह सेंगर, पंकज पाठक, महेंद्र गुप्ता, अमरीश शर्मा, जसवंत गुर्जर, निरंजन सिंह, रामवीर सिंह, राम अहमाना, शिव सिंह बघेल,राजेन्द्र सिंह एवं तमाम महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।