मोदी कैबिनेट के दो ताकतवर मंत्रियों के बीच टकराव ? 5 प्वाइंट में जानें आखिर क्यों है वर्चस्व की लड़ाई
भारतीय जनता पार्टी बेहत संगठित और अनुशासित पार्टी मानी जाती है। किसी भी संगठन में लंबे समय तक सिर्फ एक व्यक्ति को तवज्जो मिलने लगे तो दूसरे नेताओं का रूठना तय है। कुछ ऐसा ही नजारा मध्य प्रदेश की राजनीति में दिखने लगा है। पिछले दिनों की कुछ घटनाओं पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि बीजेपी में अब एंटीइन्मबेंसी जोरों पर है। पार्टी में सबसे ज्यादा फूट ग्वालियर चंबल क्षेत्र में दिखाई दे रही है। इसका कारण यहां पर दो ध्रुवों का मिलन बताया जा रहा है। कद्दावर नेता केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मनमुटाव की खबरें हैं। तोमर जहां कूल नेचर के व्यक्ति माने जाते हैं, वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुखरता पार्टी में साफ देखी जा रही है। भिंड में जन आशीर्वाद यात्रा हो या ग्वालियर में लाड़ली बहनों के खातें में पैसे डाले जाने वाला कार्यक्रम नरेन्द्र सिंह तोमर ने दूरी बनाए रखी।
- केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक हैं। उनके नेतृत्व में ही प्रदेश में सभी बैठकें हो रही हैं। कहा जा रहा है कि यह बातें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को अंदर ही अंदर चुभ रही हैं। हालांकि इसके पहले ही ही दोनों के बीच टकराव की खबरें सामने आ चुकी हैं।
- कांग्रेस में रहते वक्त ज्योतिरादित्य सिंधिया का पूरे ग्वालियर चंबल क्षेत्र में दखल रहा है। वहीं, इसी क्षेत्र में भाजपा में नरेंद्र सिंह तोमर का कोई तोड़ नहीं है। दो अलग-अलग पार्टी के ध्रुव एक ही पार्टी में एक ही जगह आ गए हैं तो प्रतिस्पर्धा आना स्वाभाविक है।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने करीब ढाई साल पहले ही भाजपा ज्वाइन की है, वे चाहते हैं कि उनका प्रभाव ज्यादा दिखे। वहीं, तोमर को लगता है कि उनके नेतृत्व में भाजपा इस क्षेत्र में काफी आगे रही है, तो इस चुनाव में वे कैसे पीछे दिख जाएं। दोनों ही नेताओं का ग्वालियर चंबल की राजनीति में प्रभाव है। ज्योतिरादित्य सिंधिया का दखल पूरे ग्वालियर-चंबल में है।
- साल 2020 में मध्य प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने का श्रेय ज्योतिरादित्य सिंधिया के सिर पर सजा है। अब पार्टी उन्हें आगे बढ़ा रही है। ऐसे में नरेंद्र सिंह तोमर को डर है कि कहीं सिंधिया ग्वालियर-चंबल में भाजपा का मुख्य चेहरा न बन जाएं। इस इलाके में हुए उपचुनाव में जीत के बाद भी सिंधिया का कद बढ़ा है। दोनों केन्द्र में मंत्री हैं। कम समय में ही सिंधिया को केन्द्र सरकार में कई जिम्मेदारी मिल चुकी हैं।
- अभी चुनाव के लिए टिकट वितरण का दौर चल रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया चाहते हैं कि उपचुनाव में उनके गुट के जितने प्रत्याशियों को टिकट दिया गया था, अब 2023 में भी उन्हें ही टिकट दिया जाए, जबकि तोमर का गुट चाहता है कि उनके समर्थकों को भी टिकट दिया जाये। दोनों गुट अपने-अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की कोशिश में हैं।