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मुरैना महापौर शारदा सोलंकी ने इसलिए पाला बदला

 मुरैना में महापौर के पाला बदलने की चर्चाएं तीन माह पहले से थीं, पर जब मंगलवार को अचानक महापौर शारदा सोलंकी ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली तो इसकी खबर जिला संगठन के नेताओं तक को नहीं थी। बताया जाता है कि महापौर शारदा सोलंकी के खिलाफ जिला कोर्ट में एक केस चल रहा है, जिसमें भाजपा की महापौर प्रत्याशी रहीं मीना जाटव ने उनके जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए इलेक्शन पिटीशन लगाई है।इस पर बयान, बहस पूरी हो चुकी है और नौ मई को फैसले की तारीख है, लोग इसे ही अब आनन-फानन में सोलंकी के भाजपा में शामिल होने के कदम से जोड़कर देख रहे हैं। इन दो मामलों में भाजपा ने ही घेर रखा था शारदा को महापौर शारदा सोलंकी का मायका उप्र के आगरा जिले की बाह तहसील के पिनाहट-रघुनाथपुरा में हैं, जहां एक जनवरी 1968 में इनका जन्म हुआ और पिता वासुदेव के नाम से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बना। उप्र के जाति प्रमाण पत्र से मप्र में आरक्षित सीट पर चुनाव नहीं लड़ सकतीं थीं, इसलिए 2004 में शारदा सोलंकी ने पति राजेंद्र सोलंकी के नाम से जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया, जबकि जाति प्रमाण पत्र पिता के नाम से बनता है। इस प्रमाण पत्र के लिए दिए गए पते भी गलत हैं।

महापौर को उप्र पिनाहट के सर्वोदय विद्या मंदिर स्कूल से 1986 में हाईस्कूल पास होना बताया गया। इस अंकसूची के फर्जी होने की शिकायत कोतवाली थाने में की गई। कोतवाली पुलिस ने पिनाहट के इस स्कूल से पूरा रिकार्ड मांगा तो स्कूल प्रबंधन ने पुलिस को जो पत्र दिया है, उसमें 1986 में शारदा पुत्री वासुदेव का दाखिला ही नहीं बताया है। मार्कशीट पर जो रोल नंबर बताया गया है, वह किसी नरोत्तम पुत्र भानजीत नाम के छात्र का है।

इतना ही नहीं उप्र माध्यमिक बोर्ड ने नरोत्तम पुत्र भानजीत को 1986 में सभी पेपर में गैर हाजिर व फेल बताया है और इसी रोल नंबर पर बनी महापौर की स्वाध्यायी अंकसूची में उन्हें उत्तीर्ण कर दिया है। महापौर चुनाव में निकटतम प्रतिद्वंदी रहीं भाजपा प्रत्याशी मीना मुकेश जाटव ने जाति प्रमाण पत्र को जिला कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर नौ मई को फैसला आ सकता है। इस मामले को लेकर शारदा सोलंकी हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक गईं, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी।

 

 

 
 

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