श्रीकृष्ण को क्यों लगाया जाता है पंजीरी का भोग
26 अगस्त यानी सोमवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। श्री कृष्ण मंदिरों में इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। रात 12 बजे श्री कृष्ण जन्म के समय विशेष आरती की जाएगी। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण को माखन मिश्री और लड्डू सहित कई अन्य वस्तुएं प्रसाद के तौर पर अर्पित की जाती है। इन सभी वस्तुओं में खासतौर से पंजीरी का भोग भी लगाया जाता है।
पंजीरी धनिया और शक्कर से तैयार की जाती है। पंजीरी बनाने में घी और इलायची का भी उपयोग किया जाता है। यहां आपको बताते हैं पंजीरी का क्या धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व है।
हिंदू पंचांग की मानें तो इस बार 26 अगस्त (सोमवार) को मनाया जाएगा। सुबह 3 बजकर 40 मिनट से अष्टमी तिथि शुरू होगी और अगले दिन यानी 27 अगस्त को सुबह 2 बजकर 19 मिनट पर इसका समापन होगा। पूजा का शुभ समय मध्य रात्रि 12:02 से रात्रि 12:45 तक रहेगा। व्रत का पारण 27 अगस्त को सुबह 6:36 तक किया जा सकता है।
ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल जन्माष्टमी पर चंद्रमा, वृषभ राशि में विराजित रहेंगे, जिससे जयंती योग का निर्माण होगा। इस योग में पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।