कम खाना बढ़ती उम्र की सबसे अच्छी औषधि, जवानी पर इतराए, बुजुर्गियत पर नाज होना चाहिए
90 के दशक की जिन नायिकाओं ने ओटीटी आने के बाद अपने नए लटकों झटकों से अपने पुराने प्रशंसकों को फिर से लुभाया है, उनमें रवीना टंडन नंबर वन हैं। अब उनकी बेटी राशा भी हीरोइन बनने की राह पर है। उनकी दो गोद ली हुई बेटियां भी हैं। इस बार पेश हैं रवीना टंडन की खासमखास चार बातें|
मैं जैसी हूं, वैसी ही दिखती हूं
मुझे कभी इस बात पर कोफ्त नहीं हुई कि मैं कैसी दिखती हूं। मुझे ईश्वर ने जैसा बनाया, जैसा रखा, मैंने हमेशा उस पर फख्र महसूस किया। स्कूल-कॉलेज के दिनों में मैं गोलू-मोलू थी तब भी और अब जबकि मैं 50 के पास हो चुकी हूं तब भी, मैंने खुद को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ व्रत का और शारीरिक व्यायाम का ही सहारा लिया। मेरा मानना है कि कम खाना बढ़ती उम्र की सबसे अच्छी औषधि है।
बच्चों का अतिरिक्त ख्याल, विकास में बाधा
हां, मैं चार बच्चों की मां हूं और देखा जाए तो नानी भी। लेकिन, मैंने कभी किसी बच्चे को ये नहीं बताया कि उसे क्या बनना चाहिए? माता-पिता का फर्ज मेरे हिसाब से यही है कि वह अपने बच्चों की भावनाओं को समझें, उनकी मेहनत की कद्र करें और जो वे बनना चाहते हैं, उसमें उनकी सहायता करें। बच्चों का अतिरिक्त ख्याल रखना भी कभी कभी उनके विकास में बाधक बनता है।
राशा का अभिनेत्री बनने का फैसला उनका अपना
राशा का अभिनेत्री बनने का फैसला उनका अपना है। मैंने तो कभी नहीं सोचा था मैं अभिनेत्री बनूंगी। मेरे पिता ही फिल्में बना रहे थे, मेरे दादाजी तो हाईकोर्ट के जज थे। घर में कोई डॉक्टर था। वकील तो बहुत सारे लोग थे। नानाजी फौज में। पापा की वजह से घर पर फिल्म सितारे खूब आते थे लेकिन हम कभी उनके आभा मंडल में नहीं आए। राशा की परवरिश भी ऐसी ही हुई है। उनको अपना ख्याल खुद रखना आता है, और ये सोचकर कभी कभी मैं खुद पर भी फख्र महसूस करती हूं।
इस उम्र में भी खुद पर नाज करना जरूरी
ओटीटी के आने के बाद से किरदारों की उम्र को लेकर दर्शकों की भी स्वीकार्यता बढ़ी है। अब ‘अरण्यक’ या ‘कर्मा कॉलिंग’ जैसी सीरीज में मेरी उम्र के मुताबिक किरदार लिखे जा रहे हैं तो मुझे इन्हें करने में भी दिक्कत नहीं होती। मैंने तो उम्र के साथ होने वाले सारे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिवर्तनों को पूरे सम्मान के साथ अंगीकार किया है और दूसरों से भी मैं यही कहती हूं कि अगर अपनी जवानी पर हम इतराए हैं तो इस उम्र में भी हमें खुद पर नाज होना ही चाहिए।