'दोषी है तो भी घर नहीं गिराया जा सकता'; बुल्डोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती तो योगी सरकार ने क्या दिया जवाब?
मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता इस तरह से मामले को पेश कर रहे हैं, जैसे कि कोई किसी अपराध में आरोपी होता है तो उसका मकान ढहा दिया जाता है, जबकि यह सही नहीं है। वह दिखा सकते हैं। अथॉरिटीज ने मकान ढहाए जाने से बहुत पहले नोटिस जारी किया था। निर्माण अवैध होने पर ही ढहाया जाता है।
अवैध निर्माण या अतिक्रमण को संरक्षित नहीं करेंगे: कोर्ट
पीठ ने भी स्पष्ट किया कि वह किसी अवैध निर्माण या सड़क पर अतिक्रमण को संरक्षित नहीं करेंगे, लेकिन इस संबंध में दिशा-निर्देश होने चाहिए। जस्टिस गवई ने कहा कि किसी का घर सिर्फ इसलिए कैसे गिराया जा सकता है कि वह आरोपी है। अगर वह दोषी भी है तो भी उसका घर नहीं गिराया जा सकता। जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि अवैध निर्माण पर भी कानून के मुताबिक ही कार्रवाई हो सकती है।
मेहता ने कहा कि इस मामले में जिनके घर ढहे हैं, यहां याचिका जमीयत ने दाखिल की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का हलफनामा देखते हुए कोर्ट को यह मामला बंद कर देना चाहिए, लेकिन याचिकाकर्ता जमीयत की ओर से पेश वकील दुष्यंत दवे ने कोर्ट से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।
कोर्ट ने सुझाव दाखिल करने का दिया निर्देश
दुष्यंत दवे ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक जगह का नहीं है, यह व्यापक मुद्दा है और कोर्ट को इस पर सुनवाई करके दिशा-निर्देश तय करने चाहिए। जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि यह सुनिश्चत करना जरूरी है कि कोई भी कमियों का फायदा न उठा पाए। निर्माण अवैध है तो भी कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। एक पिता का बेटा अड़ियल हो सकता है, लेकिन इस आधार पर किसी का घर गिरा दिया जाए तो यह तरीका सही नहीं है।
कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने भी बहस की। दवे और सिंह ने कहा कि यहां कुछ मामले ऐसे हैं, जिसमें किराएदार के आरोपी होने पर बुल्डोजर कार्रवाई हुई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सभी लोग अपने अपने सुझाव दाखिल करें, ताकि कोर्ट इस संबंध में पूरे देश के लिए उचित दिशा-निर्देश तय कर सके। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को अपने सुझाव मध्य प्रदेश के एडीशनल एडवोकेट जनरल नचिकेता जोशी को देने का निर्देश देते हुए मामले को 17 सितंबर को फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया।