राजस्व बढ़ाने को शराब नीति के UP मॉडल का अध्ययन करेगी MP सरकार
मध्य प्रदेश सरकार अवैध शराब और आबकारी से जुड़े अपराधों पर नियंत्रण के लिए आबकारी नीति के उत्तर प्रदेश मॉडल का अध्ययन कर उसके महत्वपूर्ण पहलुओं को अपने प्रदेश में लागू करने पर विचार करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को इसके निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री डा. यादव ने शुक्रवार को मप्र वाणिज्यिक कर विभाग की समीक्षा की। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश के आबकारी नीति के मॉडल की उपयुक्तता मध्य प्रदेश में कैसे की जा सकती है, इसका बारीकी से आकलन किया जाए और उसे लागू करने पर विचार किया जाए।
धार्मिक स्थलों से दूर दुकान
उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों के पास शराब दुकानों को लेकर जो शिकायत मिलें, उन पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए। अचल संपत्ति के पंजीयन की दर का तिमाही आधार पर मूल्यांकन हो और नियमानुसार कर जमा करने वाले व्यवसायियों को सम्मानित किया जाए।
मदिरा दुकानों की जियो-टैगिंग
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि शराब की दुकानें नगर की सीमा से डेढ़ किलोमीटर बाहर कर दी गई हैं। सभी बार और मदिरा दुकानों की जियो-टैगिंग की गई है। शराब के उत्पादन, वितरण और विक्रय तक की सभी प्रक्रियाओं की ई-आबकारी पोर्टल से निगरानी भी की जा रही है। महुआ से हैरिटेज मदिरा का विनिर्माण आरंभ किया गया है।
मुख्यमंत्री ने अचल संपत्तियों के पंजीयन को लेकर कहा कि जिन क्षेत्रों में विकास तथा अन्य गतिविधियों के कारण बाजार मूल्य में बढ़ोत्तरी हुई है, उन क्षेत्रों की दर को उस अनुपात में बढ़ाया जाए। दर का मूल्यांकन तिमाही आधार पर किया जाए। जीएसटी कर चोरी के प्रकरणों के चिह्नाकन और प्रभावी कार्रवाई पर ध्यान दें।
व्यवसायियों को किया जाएगा सम्मानित व पुरस्कृत
एंटी इवेजन ब्यूरो में उन्हीं अधिकारियों की पदस्थापना हो, जिन्होंने आडिट और सर्कलों में अच्छा काम किया हो। नियमानुसार कर जमा करने वाले व्यवसायियों को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित व पुरस्कृत किया जाए। राज्य शासन की जिन भी योजनाओं में पुनर्विचार की आवश्यकता हो, उनकी समीक्षा करें।
विकास कार्यों को प्रभावित किए बिना आय के स्रोत बढ़ाने और व्यय पर नियंत्रण के प्रयास किए जाएं। प्रदेश में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करें। इससे कर संग्रहण में और राज्य की आय बढ़ेगी।