राज्य और केंद्र में भाजपा सरकार, नगर निगम में कांग्रेस महापौर—ग्वालियर की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन?
ग्वालियर : ग्वालियर मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में बारिश ने न सिर्फ सड़कों की नींव खोली, बल्कि राजनीतिक चरित्र की भी परतें उधेड़ दीं। पानी सड़कों पर नहीं, बल्कि सत्ता की गलियों में भी बह रहा है। सवाल सिर्फ इतना है—क्या दशकों से सत्तासीन रही भाजपा ने शहर को इस हाल में छोड़ा, या महज कुछ साल में कांग्रेस की महापौर ने शहर डुबो दिया?
राज्य और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। ग्वालियर नगर निगम पर भी करीब पांच दशकों तक भाजपा का वर्चस्व रहा। इसके बावजूद, बारिश के साथ ही सड़कों का धंसना, नालियों का जाम होना और जलभराव की तस्वीरें सामने आते ही सारा ठीकरा कांग्रेस की महापौर पर फोड़ा जा रहा है। क्या सिर्फ चेहरा बदल देने से ज़िम्मेदारी भी बदल जाती है?
सवाल उठाना जरूरी है—
57 साल तक भाजपा ने जो व्यवस्थाएं बनाईं, उसकी जवाबदेही कौन लेगा?
बरसात में जो सड़के धंसी हैं, वे दो साल पहले तो बनी नहीं होंगी... फिर ये जिम्मेदार कौन?
जब नगर निगम का बजट, अधिकारी और सिस्टम भाजपा के बनाए हुए हैं, तो विफलता की गिनती सिर्फ कांग्रेस महापौर के सिर क्यों लिखी जा रही है?
ग्वालियर में हो रहे इस राजनीतिक ब्लेम-गेम को देखकर विशेषज्ञ कह रहे हैं—"सवाल पूछने वाले की नीयत साफ होनी चाहिए। जिनके हिस्से में दशकों सत्ता रही, उनकी जिम्मेदारी तय करने से क्यों बचा जा रहा है?"