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चेन्नई में हाई वोल्टेज ड्रामा, जयललिता के समाधिस्थल पर पहुंचे पन्नीरसेल्वम

चेन्नई में शशिकला के शपथ ग्रहण पर असमंजस के बीच मंगलवार देर शाम हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया है. जयललिता की गैर मौजूदगी में सीएम का पद संभालने वाले ओ पन्नीरसेल्वम जयललिता की समाधि के पास मौन होकर बैठ गए.तकरीबन आधे घंटे तक ऐसे ही बैठे रहने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि जयललिता की आत्मा ने मुझसे बात की. उन्होंने मुझे जनता को सच बताने को कहा. पन्नीर सेल्वम ने कहा कि शशिकला गुट मुझपर दबाव बना रहा है.

 

पन्नीरसेल्वम ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता था लेकिन अम्मा जब अस्पताल में थीं तो उन्होंने कहा कि पार्टी और सरकार बचाने के लिए मैं पदभार संभालूं. पन्नीरसेल्वम ने कहा कि साइक्लोन वर्धा का मामला हो, जया की मौत पर कानून व्यवस्था संभालने का मुद्दा हो या जलीकट्टू मैंने अम्मा के बताए मुताबिक काम किया. राजस्व मंत्री मेरे पास आए और बोले कि शशिकला को सीएम बनना चाहिए. मेरे खिलाफ गलत शब्द बोले गए. मुझे नीचा दिखाया गया. एक और मंत्री मेरे पास आए और बोले कि राजस्व मंत्री के शब्द गलत थे लेकिन वो चले गए और मदुरै में वही बात बोले.

गौरतलब है कि एआईएडीएमके महासचिव बनने के बाद जयललिता की करीबी रहीं शशिकला के लिए पनीरसेल्वम ने इस्तीफा देकर तमिलनाडु के सीएम की कुर्सी तो छोड़ दी लेकिन ये पिक्चर अभी बाकी जैसे हालात नजर आ रहे हैं. एक तरफ तो शशिकला के सीएम बनने के बीच कई अड़चन आ रही हैं, वहीं पार्टी के अंदर भी उनके विरोध के सुर ऊंचे हो रहे हैं.

जयललिता की भतीजी ने शशिकला के सत्ता में आने की तुलना तख्तापलट से की. इस बीच, शशिकला नटराजन की विरोधी मानी जाने वाली राज्यसभा सांसद और पार्टी से निष्कासित नेता शशिकला पुष्पा ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर विरोध किया है. शशिकला पुष्पा ने कहा है कि आपराधिक मामले जिसके खिलाफ पेंडिंग हैं वह सीएम की कुर्सी कैसे संभाल सकता है. इसके अलावा पूर्व सांसद और एआईएडीएके वर्तमान सदस्य केसी पलानीस्वामी ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर पार्टी महासचिव पद पर शशिकला के चयन को मान्यता नहीं देने की मांग की है.

राज्यपाल के बाहर होने से अटकी ताजपोशी
पहले माना जा रहा था कि शशिकला चेपौक स्थित मद्रास विश्वविद्यालय के सेंटनरी ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में शपथ ले सकती हैं, जो राज्य की दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की पसंदीदा जगह थी. यहां शपथ-ग्रहण समारोह की तैयारियां सोमवार को जोर-शोर से जारी थीं. लेकिन राज्यपाल राव फिलहाल राज्य से बाहर हैं, जिस वजह से उन्हें सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए उनके लौटने तक इंतजार करना होगा. राजभवन के अधिकारियों ने राज्यपाल के आगे के कार्यक्रम में बारे में जानकारी होने से इनकार किया है, जिसे देखते हुए शशिकला के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की अनिश्चितता बढ़ गई है.

शपथ दिलाना राज्यपाल का कर्तव्यः AIADMK
एआईएडीएमके के प्रवक्ता पनरूती एस.रामचंद्रन ने कहा कि विधिवत रूप से निर्वाचित व्यक्ति को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाना राज्यपाल का संवैधानिक कर्तव्य है. सरकार के गठन में हो रहे विलंब के बारे में पूछे जाने पर रामचंद्रन ने कहा कि पार्टी राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव के चेन्नई लौटने का इंतजार कर रही है. उन्होंने कहा कि एआईएडीएमके के विधायी दल ने सर्वसम्मति से चिनम्मा (शशिकला) को अपना नेता चुना है। हम राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव के चेन्नई लौटने का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद हमारे सभी विधायक राजभवन जाएंगे और राज्यपाल के समक्ष पेश होंगे. साथ ही चिनम्मा के नेतृत्व में सरकार के गठन को लेकर लिखित में पार्टी की मंशा जाहिर करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट में दायर हो चुकी है याचिका
शशिकला के मुख्यमंत्री पद के शपथ लेने के विरोध में सर्वोच्च न्यायालय में भी एक याचिका दायर की गई है. तमिलनाडु के अधिवक्ता सेंथिल कुमार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि यदि शशिकला मुख्यमंत्री बन जाती हैं और इस बीच सर्वोच्च न्यायालय आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें बरी किए जाने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को पलट देता है और उन्हें मजबूरन पद से इस्तीफा देना पड़ता है तो ऐसी स्थिति में राज्य में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है. उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ कर्नाटक सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की है और यह मामला शीर्ष अदालत में लंबित है.

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