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बड़े बनें पर देश सेवा का भाव सदैव अपने मन में रखें : पवैया

जिसमें पढे उसी पाठशाला में पढाने पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री 
ग्वालियर ( विनय शर्मा )। बाल्य काल में गांव की जिस पाठशाला में प्राथमिक शिक्षा का ककहरा सीखा, उसी पाठशाला में उच्च शिक्षा मंत्री  à¤œà¤¯à¤­à¤¾à¤¨ सिंह पवैया बच्चों को पढाने पहुंचे। इस सुखद संयोग पर पवैया के साथ स्कूली बच्चे भी अभीभूत हो गए। मौका था समाज के साझा प्रयासों से शिक्षा में गुणवत्ता लाने के मकसद से प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए मिल बाचें मध्यप्रदेश अभियान की शुरूआत की । 
इस अभियान के तहत मंत्री पवैया ने अपने गृह ग्राम चीनौर के शासकीय उत्कृष्ट बालक माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को पढाया। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि बडे सपने देखें और उन्हें हासिल भी करें। मगर देश सेवा का भाव सदैव अपने मन में रखें। पवैया ने कहा गरीबों की सेवा ही भारत माता की सेवा है। 
शनिवार को विशिष्ट अंदाज में लगी इस पाठशाला में उच्च शिक्षा मंत्री ने खासतौर पर नैतिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्य, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अमर शहीदों और सामान्य ज्ञान पर केन्द्रित बातें बच्चों को पढाईं। जिन-जिन बच्चों ने सवालों के सही-सही उत्तर दिए, श्री पवैया ने पुरस्कार स्वरूप बॉलपेन भेंट कर उनका उत्साह बढाया। उन्होंने बच्चों से कहा कि भारत की परंपरा है कि जो हमें कुछ देता है उसे हम आदर स्वरूप प्रणाम करते हैं। इसलिये प्रात:काल उठने के बाद सबसे पहले धरती माँ, इसके बाद माता-पिता और स्नान के बाद सूर्यदेव को प्रणाम करना हमारे देश की परंपरा है। उन्होंने कहा धरती हमें अपनी गोद में सबकुछ देती है वहीं सूर्य की रोशनी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसी तरह हमारी आजादी के लिये मर-मिटने वाले शहीदों का भी हमें आदर करना चाहिए। 
उच्च शिक्षा मंत्री  à¤ªà¤µà¥ˆà¤¯à¤¾ ने मिल बाचें मध्यप्रदेश की थीम के आधार पर बच्चों को हिंदी वर्णमाला के शब्द श, ष और स का सही-सही उच्चारण करके बताया। साथ ही राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, प्रथम राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री, अमर शहीदों, देश व प्रदेश की राजधानी इत्यादि के बारे में पूछा। इनमें से अधिकांश प्रश्नों का बच्चों ने सही-सही जवाब दिया। पवैया ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन पर प्रकाश डाला और कहा कि बापू के स्वच्छता, अहिंसा व स्वावलम्बन को जीवन का अंग बनाएं। 
कार्यक्रम के अंत में पवैया ने सभी कक्षाओं के बच्चों को अपने हाथों से लडडू वितरित किए। इस दिन पढऩे आए सभी बच्चे विशिष्ट अंदाज की पढाई और मीठे-मीठे लडडुओं का स्वाद लिए अपने घर लौटे। 

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