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बड़े बनें पर देश सेवा का à¤à¤¾à¤µ सदैव अपने मन में रखें : पवैया
जिसमें पढे उसी पाठशाला में पढाने पहà¥à¤‚चे उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ मंतà¥à¤°à¥€
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° ( विनय शरà¥à¤®à¤¾ )। बालà¥à¤¯ काल में गांव की जिस पाठशाला में पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• शिकà¥à¤·à¤¾ का ककहरा सीखा, उसी पाठशाला में उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ मंतà¥à¤°à¥€ जयà¤à¤¾à¤¨ सिंह पवैया बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढाने पहà¥à¤‚चे। इस सà¥à¤–द संयोग पर पवैया के साथ सà¥à¤•ूली बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¥€ अà¤à¥€à¤à¥‚त हो गà¤à¥¤ मौका था समाज के साà¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ से शिकà¥à¤·à¤¾ में गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ लाने के मकसद से पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ किठगठमिल बाचें मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ की शà¥à¤°à¥‚आत की ।
इस अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ के तहत मंतà¥à¤°à¥€ पवैया ने अपने गृह गà¥à¤°à¤¾à¤® चीनौर के शासकीय उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ बालक माधà¥à¤¯à¤®à¤¿à¤• विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढाया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से आहà¥à¤µà¤¾à¤¨ किया कि बडे सपने देखें और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हासिल à¤à¥€ करें। मगर देश सेवा का à¤à¤¾à¤µ सदैव अपने मन में रखें। पवैया ने कहा गरीबों की सेवा ही à¤à¤¾à¤°à¤¤ माता की सेवा है।
शनिवार को विशिषà¥à¤Ÿ अंदाज में लगी इस पाठशाला में उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ मंतà¥à¤°à¥€ ने खासतौर पर नैतिक शिकà¥à¤·à¤¾, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के जीवन मूलà¥à¤¯, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ आंदोलन के अमर शहीदों और सामानà¥à¤¯ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ पर केनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¤ बातें बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढाईं। जिन-जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ ने सवालों के सही-सही उतà¥à¤¤à¤° दिà¤, शà¥à¤°à¥€ पवैया ने पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार सà¥à¤µà¤°à¥‚प बॉलपेन à¤à¥‡à¤‚ट कर उनका उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ बढाया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से कहा कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ की परंपरा है कि जो हमें कà¥à¤› देता है उसे हम आदर सà¥à¤µà¤°à¥‚प पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करते हैं। इसलिये पà¥à¤°à¤¾à¤¤:काल उठने के बाद सबसे पहले धरती माà¤, इसके बाद माता-पिता और सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ के बाद सूरà¥à¤¯à¤¦à¥‡à¤µ को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करना हमारे देश की परंपरा है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा धरती हमें अपनी गोद में सबकà¥à¤› देती है वहीं सूरà¥à¤¯ की रोशनी के बिना जीवन की कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ à¤à¥€ नहीं की जा सकती। इसी तरह हमारी आजादी के लिये मर-मिटने वाले शहीदों का à¤à¥€ हमें आदर करना चाहिà¤à¥¤
उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ मंतà¥à¤°à¥€ पवैया ने मिल बाचें मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ की थीम के आधार पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हिंदी वरà¥à¤£à¤®à¤¾à¤²à¤¾ के शबà¥à¤¦ श, ष और स का सही-सही उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ करके बताया। साथ ही राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤—ीत, राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤—ान, पà¥à¤°à¤¥à¤® राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ व पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€, अमर शहीदों, देश व पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ की राजधानी इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ के बारे में पूछा। इनमें से अधिकांश पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¥‹à¤‚ का बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ ने सही-सही जवाब दिया। पवैया ने राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¿à¤¤à¤¾ महातà¥à¤®à¤¾ गांधी के जीवन पर पà¥à¤°à¤•ाश डाला और कहा कि बापू के सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾, अहिंसा व सà¥à¤µà¤¾à¤µà¤²à¤®à¥à¤¬à¤¨ को जीवन का अंग बनाà¤à¤‚।
कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के अंत में पवैया ने सà¤à¥€ ककà¥à¤·à¤¾à¤“ं के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अपने हाथों से लडडू वितरित किà¤à¥¤ इस दिन पढऩे आठसà¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ विशिषà¥à¤Ÿ अंदाज की पढाई और मीठे-मीठे लडडà¥à¤“ं का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ लिठअपने घर लौटे।