जागो दादा जागो
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° । मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ सरकार के कैबिनेट मंतà¥à¤°à¥€ जयà¤à¤¾à¤¨ सिंह पवैया होली बाले दिन देर से जागे , होली पर बधाई देने बाले तमाम लोग उनके घर पर खड़े थे । मगर दादा नजर नहीं आ रहे थे । शà¥à¤¬à¤¹ के 10:30 बज चà¥à¤•े थे , लोग परेशान होकर लोट रहे थे । तà¤à¥€ कà¥à¤› कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ बोले जागो दादा जागो । दादा को जब उनके à¤à¤¾à¤ˆ ने अंदर जाकर बताया तो दादा आà¤à¤–े मलते हà¥à¤ बाहर आये और आम लोगों से मिले ।