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नवीन तकनीकी का उपयोग उपभोक्ता को सस्ती और अच्छी वस्तुयें उपलब्ध कराने में करें – श्री पवैया

तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय कार्यशाला का समापन

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि 21वीं शताब्दी में शिक्षा के क्षेत्र में नवीन तकनीकियों का विकास हुआ है। इससे व्यवसायिक प्रबंधन को बेहतर बनाकर उपभोक्ता तक सस्ती और अच्छी वस्तुयें कैसे पहुँचाई जा सकें। इस पर भी विचार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह बात जीवाजी विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं व्यवसाय अध्ययनशाला द्वारा गालव सभागार में आयोजित “व्यवसाय प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी में नवीन व उभरते चलन” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय कार्यशाला के समापन अवसर पर कही। इस कार्यशाला में आठ देशों के शोधार्थियों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराकर 200 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए।

      कार्यक्रम में जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी एसोसिएशन के जर्नल सेकेट्री प्रो. फुरकान कमर, विश्वविद्यालय के रेक्टर श्री राव, कुलसचिव श्री आनंद मिश्रा, वाणिज्य व्यवसाय अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष श्री के एस ठाकुर, डीन श्री एस के सिंह सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिनिधिगण व विश्वविद्यालय के छात्र-छात्रायें उपस्थित थे।

      श्री पवैया ने कहा कि देश की आजादी के बाद से भारतवर्ष में शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यवसाय के क्षेत्र में नवीन तकनीकी विकसित करने के लिये लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके बेहतर परिणाम प्राप्त भी हुए हैं। व्यापार का स्वरूप अब विश्वव्यापी हो गया है। इस अंतराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिये सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग आवश्यक है। उन्होंने भारतवर्ष की आजादी की पूर्व की अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज की बाजार व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नये शोध में व्यवसाय को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ उपभोक्ता के हितों को संरक्षित किया जाना भी आवश्यक है। उपभोक्ता को सस्ती और अच्छी वस्तुयें कैसे प्राप्त हो सकें, इसका भी प्रबंधन नवीन तकनीकी के माध्यम से किया जाना चाहिए।

      कार्यक्रम में श्री पवैया ने देश और विदेश से आये शोधार्थियों को उनकी नई रिसर्च के लिये बधाई दी और कार्यक्रम के आयोजक को अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी रिसर्च पेपर तैयार करने और कार्यशाला की सोवनियर प्रकाशित करने की सलाह भी दी।

श्रीमती गुलाटी के शोध पत्र को चुना गया सर्वोत्तम

इस तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय कार्यशाला में सर्वोत्तम शोध पेपर के रूप में चयनित शोधार्थियों को नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की। जिसमें प्रेस्टीज कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट की श्रीमती चंदा गुलाटी को श्रीमती गरिमा माथुर के निर्देशन में तैयार किए गए शोध पत्र के लिये 11 हजार रूपए का नगद पुरस्कार प्रदान किया गया। यह शोध पत्र तैयार करने में श्री प्राशुमन पाराशर और अंकित पाराशर द्वारा भी सक्रिय भागीदारी निभाई गई।

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