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उपचुनाव: J&K के बडगाम में हिंसक झड़प में एक की मौत, भिंड में मारपीट

देश के नौ राज्यों में एक लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान जारी है। लेकिन जम्मू और कश्मीर में बडगाम के दलवान पाकेरपुरा में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प में एक व्यक्ति के मारे जाने और 5 लोगों के घायल होने की खबर है।

बडगाम के नसरूल्लाहपोरा में भी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में दो लोग घायल हो गए हैं।

वहीं, मध्यप्रदेश के भिंड में कांग्रेस उम्मीदवार के वाहन को क्षतिग्रस्त करने, दो लोगों को पीटे जाने और बूथ पर कब्जा किए जाने की खबर है। कांग्रेस ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर ऐसा करने का अरोप लगाया है।

चुनाव आयोग की सूचना के अनुसार, विभिन्न कारणों से रिक्त हुई इन सीटों के लिए मतदान हो रहा है। आज की वोटिंग का परिणाम 13 अप्रैल को घोषित किया जाएगा।

आयोग के अनुसार, लोकसभा सीट के लिए जम्मू-कश्मीर की श्रीनगर में उपचुनाव हो रहा है। इसके अलावा जिन राज्यों में विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हो रहा है, उनमें असम की धेमाजी सुरक्षित, हिमाचल प्रदेश की धोरंज सु, मध्य प्रदेश की अटेर तथा बांधवगढ़ सु, पश्चिम बंगाल की कांठी दक्षिण, दिल्ली की राजौरी गार्डन, राजस्थान की धौलपुर, कर्नाटक की नंजनगुड तथा गुंडुलूपेट और झारखंड की लिटीपारा सु सीट शामिल है।

श्रीनगर लोकसभा सीट पर फारूक अब्दुल्ला सहित नौ उम्मीदवार

श्रीनगर लोकसभा सीट पर नेश्नल कॉन्फ्रेन्स के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला सहित नौ उम्मीदवार मैदान में हैं। करीब 12.61 लाख मतदाताओं के लिए 1,500 से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान सुबह सात बजे शुरू हो गया और शाम पांच बजे तक चलेगा।

श्रीनगर लोकसभा सीट पीडीपी के नेता तारिक हमीद कारा के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई थी। कारा ने पिछले साल आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के हाथों हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उत्पन्न अशांति के दौरान लोगों पर ज्यादतियों के विरोध में अपनी पार्टी और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था।

अलगाववादियों की धमकी के बाद त्रिस्तरीय सुरक्षा

अलगाववादियों की लोकसभा उपचुनाव के बहिष्कार की धमकी और लगातार हो रहे आतंकी हमलों के मद्देनजर चुनाव को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने रणनीति बदलते हुए चुनाव के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया है ताकि मतदाताओं को डराया धमकाया नहीं जा सके और वे बिना किसी डर भय के वोटिंग कर सकें।

बता दें कि सुरक्षा एजेंसियों को इस बात के इनपुट मिले थे कि मतदान के लिए निकलने वाले मतदाताओं को डराया धमकाया जा सकता है। इसके लिए अलगाववादियों और आतंकी तंजीमों की ओर से गांव-गांव में लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने बैठक कर त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाने की रणनीति बनाई।

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