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राज्यसभा चुनाव 2026: MP में कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, BJP की रणनीति से दोहरी चुनौती

भोपाल। चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर 18 जून 2026 को मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना की जाएगी। प्रदेश से भाजपा के जॉर्ज कुरियन और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी तथा कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के सामने इस बार दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। पहली चुनौती उम्मीदवार चयन को लेकर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने दोबारा राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में जुटी है जो संगठन और विधायकों के बीच सर्वमान्य हो तथा प्रदेश में राजनीतिक पकड़ भी रखता हो। कई नेताओं की दावेदारी सामने आने से पार्टी के भीतर खींचतान की स्थिति बनी हुई है। इस मुद्दे पर 5 मई को दिल्ली में बैठक भी हो चुकी है। प्रदेश कांग्रेस जल्द नामों पर चर्चा कर प्रस्ताव अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) को भेजेगी।

दूसरी और सबसे बड़ी चुनौती क्रॉस वोटिंग का खतरा है। राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 58 विधायकों का समर्थन जरूरी है, जबकि कांग्रेस के पास फिलहाल केवल 62 वोटिंग विधायक ही बचे हैं। बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले, मुकेश मल्होत्रा के मतदान अधिकार निलंबित होने और राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने से पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा डमी प्रत्याशी उतारकर कांग्रेस की एक सीट पर समीकरण बिगाड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में यदि क्रॉस वोटिंग होती है तो कांग्रेस की सीट खतरे में पड़ सकती है।

इधर भाजपा ने भी अपनी दोनों सीटों को लेकर मंथन तेज कर दिया है। पार्टी नए समीकरणों और नए चेहरों पर विचार कर रही है। केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन को दोबारा मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि आदिवासी चेहरे और संघ पृष्ठभूमि वाले डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी के नाम पर भी चर्चा जारी है। हालांकि पार्टी युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। भाजपा संगठनात्मक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला करेगी।

कांग्रेस में राहुल गांधी की पसंद के तौर पर मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति के तहत हाईकमान उन्हें मजबूत विकल्प के रूप में देख रहा है। वर्तमान में वे पंचायत राज प्रकोष्ठ की प्रभारी और तेलंगाना प्रभारी हैं। गांधी परिवार के करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को पार्टी विचारधारा के प्रति समर्पित नेता के रूप में देखा जाता है। बताया जा रहा है कि पिछली बार भी उनका नाम लगभग तय था, लेकिन कमलनाथ की सहमति से अशोक सिंह यादव को राज्यसभा भेजा गया था।

मध्यप्रदेश में इस बार का राज्यसभा चुनाव केवल सीटों का गणित नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का भी बड़ा मंच बनता दिखाई दे रहा है। भाजपा की आक्रामक रणनीति और क्रॉस वोटिंग की आशंका ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। अब सबकी नजर दिल्ली से आने वाले अंतिम संकेतों और उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी हुई है।

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