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नक्सलियों से निपटने पर राजनाथ करेंगे मीटिंग, 10 राज्यों के CM होंगे शामिल

सुकमा में नक्सल अटैक के बाद आज गृहमंत्री राजनाथ सिंह 10 राज्यों के साथ मीटिंग करेंगे. इस मीटिंग में नक्सल समस्या को लेकर मंथन किया जाएगा, साथ ही उनसे पार पाने की रणनीति तैयार की जाएगी.

मीटिंग में कौन होगा?
इस मीटिंग में 10 नक्सल प्रभावित राज्यों के सीएम शामिल होंगे. उनके साथ ही 35 संवेदनशील जिलों के डीएम और एसपी भी इस बैठक का हिस्सा होंगे. सभी राज्यों के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और पैरामिलिट्री फोर्स के डीजी भी इस बैठक का हिस्सा होंगे. नक्सल प्रभावित राज्यों में हालात पर नजर रखने वाले गृह मंत्रालय के 'लेफ्ट विंग एक्सट्रिमिज्म डिविजन' के अधिकारी भी बैठक में भाग लेंगे.


इनके अलावा सड़क परिवहन और राजमार्ग, रेलवे, नागरिक उड्डयन, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार विभाग के केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे.

ये होगा मीटिंग का एजेंडा
इस मीटिंग का मुख्य मुद्दा आंतरिक सुरक्षा होगा. बैठक में नक्सलियों से निपटने के लिए रणनीति पर विमर्श किया जाएगा. बताया गया है कि बैठक में नक्सलियों के खिलाफ 2016 की मुहिम को बनाए रखने और नई रणनीति पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

दिन भर चलने वाली इस बैठक में दो सत्र होंगे. इसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के संचालन में राज्यों की भूमिका और भारतीय रिजर्व बटालियंस और विशेष भारतीय रिजर्व बटालियंस की स्थापना और तैनाती पर चर्चा की जाएगी.

साथ ही क्षमता निर्माण और खुफिया मुद्दों जैसे राज्य पुलिस बलों में भर्तियां, राज्य खुफिया इकाइयों में क्षमता निर्माण और दूसरे मंत्रालयों से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की जाएगी.

ये राज्य हैं नक्सल प्रभावित
छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के 106 जिले नक्सली हिंसा से प्रभावित हैं.

सुकमा अटैक में हुए थे 25 जवान शहीद
छत्तीसगढ़ के सुकमा में 24 अप्रैल को नक्सली हमला हुआ था. इस हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए थे. इससे पहले 11 मार्च को हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हुए थे.

सुकमा अटैक के बाद गृहमंत्री और प्रधानमंत्री ने कहा था कि जवानों की ये शहादत बेकार नहीं जाएगी. अटैक के तुरंत बाद ही ये मीटिंग बुलाई गई थी.

बता दें कि जनवरी 2011 से 15 अप्रैल 2017 के बीच हुए नक्सली हिंसा से जुड़े 7,781 मामले सामने आ चुके हैं. इन हमलों में अब तक कुल 3,136 लोगों की मौत हुई है. जिसमें नागरिक, सुरक्षाकर्मी और कथित पुलिस मुखबिर शामिल हैं.

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