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मोदी की इस योजना पर खानापूर्ति कर रही रमन सरकार

रायपुर। दो साल पहले बनी केंद्र सरकार की ग्रीन बिल्डिंग स्कीम राज्य में ध्वस्त हो गई है। विभाग अभी तक इसके नियम-कायदे बनाने में ही उलझा है। न तो राज्य सरकार रुचि दिखा रही है और न ही बिल्डर्स। नतीजतन हजारों बिल्डिंग्स में सिर्फ 10 के ग्रीन होने का दावा किया जा रहा है।

अब जिम्मेदारों का कहना है कि इसके लिए जल्द नियम-कानून बनाकर सरकार और इंसेटिव के लिए भी विचार कर रही है। केंद्र सरकार ने अपनी शहरी योजना 'अमृत' के तहत राज्य सरकारों को फंड देने के लिए ग्रीन बिल्डिंग में इन्सेंटिव देने की शर्त लगाई थी। राज्य में दो साल में सिर्फ खानापूर्ति हुई है।

क्या है ग्रीन बिल्डिंग

विकास के नाम पर लगातार निर्माण के कारण प्रकृति-पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इसे देखते हुए दुनियाभर में इस पर शोध किया गया है। नुकसान को रोकने के लिए ग्रीन बिल्डिंग बनाने पर जोर दिया जाने लगा।

ग्रीन बिल्डिंग का अर्थ ऐसी बिल्डिंग या भवन से है, जो पर्यावरण को ध्यान में रखकर रिसाइकल्ड मटेरियल के उपयोग से बनाई गई हो। इसमें हरियाली हो, प्राकृतिक रूप से रोशनी हो, ऊर्जा और हवा का पूरा उपयोग किया जा सके। खिड़की-दरवाजे इस तरह बनाए जाते हैं कि रोशनी हर कोने में पहुंचे। साथ ही रेटिंग देने वाली केंद्रीय एजेंसी 'गृह' से सर्टिफाइड होनी चाहिए।

नहीं मिल रही रियायत

राज्यभर में 80 से अधिक रजिस्टर्ड बिल्डर हैं, जिनके हजारों मकान हैं। ग्रीन बिल्डिंग बनाने के लिए मांग करने के बावजूद उन्हें शासन की ओर से कोई रियायत नहीं मिल रही है, जबकि अफसर कह रहे हैं कि बिल्डर अगर सर्टिफाइड ग्रीन बिल्डिंग बनाएं तो उन्हें नियमों के तहत फायदे मिलेंगे।

ये हो रही दिक्कत

बिल्डरों का कहना है ग्रीन बिल्डिंग की लागत 30 से 40 फीसदी अधिक होती है। लागत अधिक होने से लोगों का रुझान कम रहता है और शासन प्रोत्साहित नहीं करता। वैसे भी रियल इस्टेट कारोबार स्लोडाउन से गुजर रहा है। मार्केट की रफ्तार बढ़ाने ऑफरों की बौछार की जा रही है। उपभोक्ताओं को लुभाने तरह-तरह की रणनीति बनाई जा रही है।

दिल्ली, गुजरात में दिया आकर्षण

जबकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात आदि में राज्य सरकारें ग्रीन बिल्डिंग बनाने वालों को कई तरह की सब्सिडी, अतिरिक्त एफएआर, बिजली बिल में छूट देकर प्रेरित कर रही हैं।

बिल्डर्स की मांग

प्रॉपर्टी टैक्स में मिले छूट

एफएआर में मिले फायदा

ग्रीन बिल्डिंग बनाने पर राज्य सरकार करे अवॉर्ड

काफी पीछे हैं दुनिया में हम

ग्रीन बिल्डिंग मामले में अमेरिका और चीन समेत अन्य देशों से भारत बहुत पीछे है। हालांकि गुजरात, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, महराष्ट्र में ग्रीन बिल्डिंग के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। राज्य में निजी व सरकारी क्षेत्र की सिर्फ 10 भवन ही ग्रीन बिल्डिंग का दर्जा प्राप्त हैं। इनमें भी सरकारी क्षेत्र आगे है।

ऐसे रहते हैं मकान ठंडे

गर्मी के दिनों में बिना किसी संसाधन के मकान को ठंडा रखने की तकनीक ग्रीन बिल्डिंग में होती है। फ्लाईएश की ईंट अपेक्षाकृत ठंडी होती है। गर्म हवा और धूप से मकान की बाहरी दीवारें काफी गर्म हो जाती हैं, ऐसे में फ्लाइएश की ईंटें अंदर को ठंडा बनाए रखती हैं। इससे तापमान को करीब 10 फीसदी कम किया जा सकता है।

वहीं ऐसे भवनों में भूमि का जल स्तर बढ़ाने के लिए वर्षा जल और सीवरेज के पानी को ट्रीटमेंट कर जमीन में समाहित करने की तकनीक का à¤‡à¤¸à¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है, वहीं इन मकानों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। 

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