Home > प्रमुख खबरे,slider news,अपना मध्यप्रदेश,
सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ शेष- सà¥à¤µ. अनिल माधव दवे - शिवराज सिंह चौहान
à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ नहीं होता है कि अनिल दवे जी अब हमारे बीच नहीं हैं। अदà¤à¥à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के धनी, नदी संरकà¥à¤·à¤•, परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¤µà¤¿à¤¦, मौलिक चिंतक, कà¥à¤¶à¤² संगठक थे। अनिल जी मौलिक लेखक थे। वे कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾à¤¶à¥€à¤² मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के धनी थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अनेकों किताबें लिखीं। वे असाधारण रणनीतिकार थे। बचपन से जीवन à¤à¤¾à¤°à¤¤ माता के चरणों में समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर दिया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ सेवक संघ के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤• के नाते पूरा जीवन, देश और समाज की सेवा में समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर दिया।
अनिल जी को जो à¤à¥€ दायितà¥à¤µ मिला, उनको पूरा किया। संघ की योजना के अनà¥à¤°à¥‚प वे à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² विà¤à¤¾à¤— के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤• थे और मैं उनका सà¥à¤µà¤¯à¤‚-सेवक रहा। वे सबका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखते थे। मà¥à¤à¥‡ याद है कि जब मेरा जब à¤à¤•à¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट हà¥à¤† था तब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मेरा आपरेशन मà¥à¤®à¥à¤¬à¤ˆ में डॉ. ढोलकिया के हाथों से ही करवाना सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ किया था। वे अपने कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं का हमेशा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखते थे। सदैव कारà¥à¤¯ में रमे रहते थे । कà¥à¤¶à¤² रणनीतिकार थे। वरà¥à¤· 2003, 2008 व 2013 के विधान सà¤à¤¾ व लोक सà¤à¤¾ के चà¥à¤¨à¤¾à¤µ उनकी कà¥à¤¶à¤² रणनीति के कारण हम जीते, मैं यह कहूठतो अतिशयोकà¥à¤¤à¤¿ नहीं होगी। विजय में उनका उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय योगदान था।
सदैव काम मे लगे रहने वाले, रमे रहने वाले à¤à¤µà¤‚ माठनरà¥à¤®à¤¦à¤¾ के वे à¤à¤¸à¥‡ à¤à¤•à¥à¤¤ थे कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जब à¤à¥€ समय मिलता था, मैयà¥à¤¯à¤¾ के तट पर पहà¥à¤à¤š जाते थे। वे पायलट थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ की परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ छोटे विमान से की थी, फिर राफà¥à¤Ÿ से गà¥à¤œà¤°à¥‡ थे। इस दौरान नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ संरकà¥à¤·à¤£ के लिठगाà¤à¤µà¥‹à¤‚ में संरकà¥à¤·à¤£ चौपाल बैठकें की थीं। बांदराà¤à¤¾à¤¨ में नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ महोतà¥à¤¸à¤µ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दो वरà¥à¤· में आयोजन करते थे। मैं à¤à¥€ उसमें à¤à¤¾à¤— लेता था। 'नमामि देवि नरà¥à¤®à¤¦à¥‡'-सेवा यातà¥à¤°à¤¾ का विचार जब मैंने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बताया था तो वे बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤ थे। मेरी बहà¥à¤¤ इचà¥à¤›à¤¾ थी कि वे नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ सेवा यातà¥à¤°à¤¾ में आये और वे 09 मई को यातà¥à¤°à¤¾ में आà¤à¥¤ नदी जल और परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ संरकà¥à¤·à¤£ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में 8 मई को à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² में à¤à¤¾à¤— लिया था। परसों उनसे मेरी बात हà¥à¤ˆ थी। मैंने बताया कि अमरकंटक कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ हà¥à¤†à¥¤ मैंने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आगे की योजनाà¤à¤ बनाईये à¤à¤µà¤‚ मिलकर उसे पूरी करना है। बहà¥à¤¤ à¤à¤µà¤‚ अलà¥à¤ª समय में परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ à¤à¤µà¤‚ वन मंतà¥à¤°à¥€ होने के नाते असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होने के बाद à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बडी दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• कà¥à¤¶à¤²à¤¤à¤¾ का परिचय दिया था। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ारों में पले-बढे पगे अनिल जी अब हमारे बीच नहीं हैं, सहज à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ नहीं होता।
उनके निधन से हमने कà¥à¤¶à¤² संगठक, नदी संरकà¥à¤·à¤•, परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¤µà¤¿à¤¦ à¤à¤µà¤‚ à¤à¤• नेतृतà¥à¤µ जो देश के लिठसमरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ था उसे खोया है। उनका जाना पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ व देश के लिठअपूरणीय कà¥à¤·à¤¤à¤¿ है। लेकिन 0 अबनपर 8 बजे अंतिम यातà¥à¤°à¤¾ के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त रूप से मेरी कà¥à¤·à¤¤à¤¿ है। मैं सदमें में हूà¤à¥¤ लेकिन नियती पर किसी का बस नहीं है। उनकी वसियत मिली है जिसमें उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा है कि यदि संà¤à¤µ हो तो उनका अंतिम संसà¥à¤•ार बांदà¥à¤°à¤¾à¤à¤¾à¤¨ में नदी महोतà¥à¤¸à¤µ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर किया जाà¤à¥¤ अंतिम संसà¥à¤•ार वैदिक रीति से करें à¤à¤µà¤‚ उनकी सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में सà¥à¤¥à¤² का नामकरण, पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—िता इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ का आयोजन न करें। अगर कà¥à¤› करना है तो पेड़ लगाठà¤à¤µà¤‚ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ कर बà¥à¥‡ करें à¤à¤µà¤‚ नदी तालाब का संरकà¥à¤·à¤£ का कारà¥à¤¯ करेंगें तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आनंद होगा और ये करते हà¥à¤ à¤à¥€ उनके नाम का उलà¥à¤²à¥‡à¤– न करें। à¤à¤• महामानव ही इस तरह की वसियत लिख सकता है।
मैं उनके चरणों में पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करता हूà¤à¥¤ à¤à¤—वान ने शà¥à¤°à¥€ चरणों में उनको सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ दिया है। ईशà¥à¤µà¤° दिवंगत आतà¥à¤®à¤¾ शांति दे। मेरे जैसे हजारों कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ परिजनों को गहन दà¥à¤– सहन करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ दे। हो सके तो अनिल जी फिर लौटें........