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पाक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा भारत- अमेरिकी अधिकारी

वाशिंगटन. अमेरिका के रक्षा सुरक्षा प्रमुख ने अमेरिकी संसद की एक समिति को बताया कि भारत एक ओर पाकिस्तान को राजनयिक मुद्दे पर अलग-थलग करने की कोशिशों में जुटा है तो वहीं दूसरी ओर सीमापार आतंकवाद का समर्थन करने के लिए पाक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी भी कर रहा है. इस बीच डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने पाकिस्तान को दी जाने वाली  à¤•रीब 1200 करोड़ रु. की मदद में कटौती की है. लेफ्टिनेंट जनरल विंसेट स्टीवर्ट ने अमेरिकी संसद की आर्म्ड सर्विसेज कमिटी को विश्व स्तरीय खतरों पर बातचीत के दौरान इस बात की जानकारी दी. जनरल विंसेट का बयान उस वक्त आया है जब एक दिन पहले ही भारतीय सेना ने सीमापार कड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की एक पोस्ट को तबाह किया है.

उन्होंने कहा कि भारत हिंद महासागर में खुद की सुरक्षा और हितों के लिए अपनी सेना के आधुनिकीकरण में लगा हुआ है. इसके साथ ही आर्थिक और राजनयिक तौर पर भी वो पूरे एशिया में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है. विंसेट ने आगे कहा कि भारत पर हुए कई आतंकी हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्ते बहुत खराब हुए है. पिछले साल सितंबर में आर्मी बेस पर हुए हमले के बाद भारत ने सीमापार बड़ी कार्रवाई की थी. 2016 में भी दोनों ही देशों ने सीमापार से बड़ी कार्रवाई की, दोनों देश एक-दूसरे के राजनयिक हटा चुके हैं यही वजह है कि लगातार दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.

उन्होंने सांसदों को यह भी बताया कि 2017 में इस्लामाबाद ने पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों के जरिए आतंकवादी, सांप्रदायिक ताकतों, आतंकवादी और अलगाववादियों की हिंसा को रोकने में कुछ हद तक सफलता हासिल की है. विंसेट ने ये भी कहा कि इस ओर ध्यान देने की जरूरत है कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियारों की तादात बढ़ी है. अपने निजी हितों के लिए लगातार परमाणु हथियारों के विकास ने एक स्थायी खतरा भी पैदा कर दिया है. विंसेट ने साउथ चाइना सी में चीन के बढ़ते हितों की भी बात करते हुए समिति को आगाह किया.

अरब कूटनीति- à¤­à¤¾à¤°à¤¤ ने चीन और पाकिस्तान की खतरनाक जुगलबंदी को तोड़ने के लिए वियतनाम, जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और अन्य देशों को अपने पक्ष में लामबंद कर चक्रव्यूह तैयार कर लिया है. इस साल 2017 के गणतंत्र दिवस समारोह के लिए अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को मुख्य अतिथि बनाकर एक अहम कूटनीतिक चाल चली जिससे पाकिस्तान के होश उड़ गये. सऊदी अरब की तरह संयुक्त अरब अमीरात भी पाकिस्तान का पुराना सामरिक सहयोगी है. यूएई, सऊदी अरब और पाकिस्तान ही ऐसे तीन देश थे जिन्होंने अफगानिस्तान में तालिबानी शासन को मान्यता दी थी. अब इन सभी से भारत के अच्छे रिश्ते बन रहे हैं क्योंकि मोदी सरकार की कूटनीतिक नीतियों में राष्ट्र का हित सर्वोपरि है. मोदी जब से सत्ता में आए हैं, उनके विदेश दौरों में मध्य पूर्व प्रमुखता से छाया रहा है. दोनों देश आतंकवाद से जंग और सिक्योरिटी के मसले पर एक-दूसरे को हरसंभव सहयोग कर रहे हैं.

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