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किसानों के हित के लिए किसी भी सीमा तक जाकर काम करेंगे : सीएम

भोपाल, रतलाम। किसान आंदोलन को लेकर रतलाम के पास डेलनपुर में हुई हिंसक घटना पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जो लोग हिंसा कर रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा प्रदेश में दूध के दामों को अमूल डेयरी के दामों की व्यवस्था से जोड़ा जाएगा, किसानों के हित के लिए किसी भी सीमा तक जाकर काम करेंगे। कांग्रेस किसानों का सहारा लेकर आंदोलन को हिंसक बना रही है।

समर्थन मूल्य पर प्याज की खरीदी के लिए आज से ही व्यवस्था होगी। सीएम ने किसान आंदोलन मामले में सोमवार दोपहर सीएम हाउस में आपात बैठक बुलाई, जिसमें मंत्री भूपेंद्र सिंह सहित सूबे के आला अधिकारी भी शामिल हुए।

50 फीसदी कैश भुगतान

मंडी बोर्ड ने फसल बेचने पर किसानों को 50 प्रतिशत कैश भुगतान करने की घोषणा की है, बाकी 50 प्रतिशत किसानों के खाते में जमा किए जाएंगे।

इसके पहले रविवार को उज्जैन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कुछ मांगों को मान लिए जाने के बाद स्थगित हो गया। इसका ऐलान भारतीय किसान संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवकांत दीक्षित ने किया, लेकिन इसे भारतीय किसान यूनियन ने नकार दिया। बिजलपुर और राऊ के किसानों ने भी आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया है।

इसके चलते आंदोलन बंट गया। देर रात किसान सेना ने आंदोलन वापस ले लिया। इसके बाद रविवार रात तक यह असमंजस बना रहा कि सोमवार से दूध-सब्जी की उपलब्धता सामान्य होगी या नहीं। भारतीय किसान यूनियन ने धमकी दी है कि दो दिन में मांगें नहीं मानीं तो 10 जून को पूरा प्रदेश बंद करेंगे।

ये मांगें मानीं

- मंडियों में उपज बेचने पर 50% भुगतान नकद, 5% आरटीजीएस से बैंक खाते में जमा होगा।

- सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्याज खरीदेगी। प्रति किलो के आठ रुपए दिए जाएंगे। खरीदी अगले सप्ताह से शुरू होकर जून अंत तक चलेगी।

- गर्मी की मूंग भी समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी।

- फसल बीमा ऐच्छिक बनाएंगे।

- सब्जी मंडियां भी मंडी अधिनियम में लाई जाएंगी, ताकि किसानों को ज्यादा आढ़त न देनी पड़े।

- नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम के किसान विरोधी प्रावधानों को हटाया जाएगा।

- आंदोलन की वजह से किसानों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे।

किसान संघ को हक नहीं : यादव भारतीय किसान यूनियन के महामंत्री अनिल यादव और किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने कहा कि किसान संघ पहले दूर रहा। आंदोलन प्रदेश में फैल गया तो सरकार से बात कर आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी, जबकि उन्हें इसका अधिकार ही नहीं है।

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