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किसान आंदोलन: गुप्तचर एजेंसियों के फेलियर से शिवराज अचंभित

शिवराज यानि शिव-राज, मतलब भोलेभाले की सरकार। जो हरदम हर वर्ग खासकर किसानों का मसीहा है। आज उन्हीं के हिंसक आंदोलन में उलझ गया। इस धरती पुत्र ने अपनी सरकार में खेती को फायदे का धंधा बनाने का पुरजोर प्रयास किया। परंतु अफसरशाही के हॉॅवी होने से योजनाओं को पलीता लगता रहा है। वहीं गुप्तचर एजेंसियां इसकी भनक तक सरकार को देने में पूरी तरह फैल हो गई। 
किसान आंदोलन इतना उग्र होगा इसका पता तक गृह विभाग और अन्य गुप्तचर एजेंसियों को बिल्कुल लगा ही नहीं, जिससे सरकार अंधेरे में रही। शिवराज इस बात से हलाकान है कि इतना बड़ा आंदोलन बिना सरकार को सूचना लगे कैसे हो गया, गृह विभाग सहित गुप्तचर एजेंसियां उस दौरान क्या कर रही थी। वहीं अफसरों का भी आंदोलन में ढुलमुल रवैया सरकार की इमेज पर पानी फेर गया। खासकर गृह विभाग के अफसरों के अलग अलग बयानों ने बेकसूर किसानों पर गोलीबारी कराकर उनको लील लिया। किसानों की मौत से अब तक खुद शिवराज सिंह बेहद दुखी है। गृह विभाग के उदासीन रवैये ने शिवराज का काफी मनोबल गिराया है। सरकार का सकारात्मक मैसेज देने के लिए शिवराज को उपवास तक पर जाना पड़ा। अब मुख्यमंत्री शिवराज राज्य सरकार के अधीन वाली गुप्तचर एजेंसियों में कसावट लाने के लिए बड़ी पहल कर सकते है। वहीं गृह विभाग में मंत्री से लेकर अफसरों में बदली की जाएगी। जिम्मेदार अधिकारियों को गृह विभाग के बड़े पदों पर बैठाया जायेगा।

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