पकड़े गठशौकीन चोर
गà¥à¤¡à¤¼à¤—ांव पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने चार à¤à¤¸à¥‡ शातिर चोरों को गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤° किया है, जो अपने महंगे शौक को पूरा करने के लिठगà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¤—ार बन गà¤. यह चोर रहते तो दिलà¥à¤²à¥€ में थे लेकिन चोरी की वारदातों को गà¥à¤¡à¤—ांव में अंजाम दिया करते थे ताकि पà¥à¤²à¤¿à¤¸ की पकड़ में न आ सकें.
चोरों के नाम दीपक, संदीप, विकास और रणजीत हैं. पà¥à¤²à¤¿à¤¸ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, यह लोग जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° उन घरों को अपना निशाना बनाते थे, जिनमें लोग घूमने या फिर किसी काम से बाहर गठहà¥à¤ होते थे. à¤à¤¸à¥‡ घरों को तलाशने के लिठयह लोग सà¥à¤¬à¤¹ के वकà¥à¤¤ बाकायदा रेकी करते थे. गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का मौसम और शादी का सीजन इनका पसंदीदा समय होता था.
दरअसल इस वकà¥à¤¤ या तो लोग घरों में मौजूद नहीं होते हैं या फिर शादी से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ कामों में मशगूल रहते हैं. पà¥à¤²à¤¿à¤¸ की मानें तो इनकी उमà¥à¤° à¤à¤²à¥‡ ही कम हो लेकिन यह लोग चंद मिनटों में घर या दà¥à¤•ान साफ करने में माहिर हैं. किसी à¤à¥€ ताले को मिनटों में खोलने में इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ महारत हासिल है.
चोरी के सामान को यह लोग आपस में बराबर बांट लेते थे. सामान बेचने के बाद इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जो पैसे मिलते उससे यह लोग मौज-मसà¥à¤¤à¥€ करते थे. डिसà¥à¤•ो जाना, महंगे कपड़े पहनना इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ काफी पसंद था. इनकी गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤°à¥€ से करीब दो दरà¥à¤œà¤¨ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वारदातों का खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ हà¥à¤† है. पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने इनके पास से चोरी का काफी सामान à¤à¥€ बरामद किया है.