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UP: योगी के मंत्री नहीं बता पाए GST का फुलफॉर्म, सिर्फ बोले- पता है...पता है

महारजगंज.योगी सरकार में समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री गुरुवार को यूपी के महाराजगंज में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स) के बारे में जनता को बताने गए थे। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे जीएसटी का फुलफॉर्म पूछा तो वे इसे बता न सके। बता दें, देश में 1 जुलाई से नया टैक्स सिस्टम जीएसटी लागू होने जा रहा है। मंत्री ने कहा- जीएसटी का फुल फॉर्म है...

- योगी के मंत्री रमापति शास्त्री गुरुवार को महाराजगंज के कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान वे जीएसटी को लेकर चर्चा कर रहे थे।
- इसी बीच एक पत्रकार ने उनसे जीएसटी का फुल फॉर्म पूछ लिया। इसके बाद मंत्री जी ने कहा- ''जीएसटी का फुल फॉर्म है...और इतना कहकर मंत्री रुक गए। फिर बोले- पता है...पता है।''
- इस दौरान मंत्री को पीछे से कई लोग सुझाव भी दे रहे हैं। वीडियो में सुनाई दे रहा है कि पीछे से एक आदमी मंत्री जी को फुल फॉर्म बताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वो भी गलत जानकारी दे रहा है। वो शख्स जीएसटी को 'गवर्नमेंट सर्विस टैक्स' बता रहा है।
क्या है GST?
-GST का मतलब गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स है। इसको केंद्र और राज्‍यों के 17 से ज्‍यादा इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के बदले में लागू किया जाएगा। ये एक ऐसा टैक्‍स है, जिसे देश भर में किसी भी गुड्स या सर्विसेज की मैन्‍युफैक्‍चरिंग, बिक्री और इस्‍तेमाल पर लागू होगा।
- इसके लागू होने के बाद से एक्‍साइज ड्यूटी, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), राज्य स्तर पर सेल्स टैक्स यानी वैट, एंट्री टैक्स, लॉटरी टैक्स, स्टैंप ड्यूटी, टेलिकॉम लाइसेंस फी, टर्नओवर टैक्स, बिजली के उपयोग या बिक्री पर लगने वाले टैक्स, गुड्स के ट्रांसपोर्टेशन पर लगने वाला टैक्स आदि खत्म हो जाएंगे।
- सरल शब्‍दों में कहें ताे जीएसटी पूरे देश के लिए इनडायरेक्‍ट टैक्‍स है, जो भारत को एक समान बाजार बनाएगा। जीएसटी लागू होने पर सभी राज्यों में लगभग सभी गुड्स एक ही कीमत पर मिलेंगे। अभी एक ही चीज के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। इसकी वजह अलग-अलग राज्यों में लगने वाले टैक्स हैं। इसके लागू होने के बाद देश बहुत हद तक सिंगल मार्केट बन जाएगा।
इस बिल के पास होने के मायने
- 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने की उम्मीद है।
- वन नेशन-वन टैक्स की 17 साल से जारी टैक्स रिफॉर्म की कोशिश कामयाब होगी। सबसे पहले वाजपेयी सरकार ने 2000 में जीएसटी के बारे में सोचा था।
- 20 से ज्यादा इनडायरेक्ट टैक्स खत्म होंगे। ये देश के लिए ऐतिहासिक होगा।
जीएसटी की कितनी होगी कुल दर?
- इस पर अभी आम सहमति नहीं बन पाई है। राज्य 27 फीसद से ज्यादा जीएसटी चाहते हैं। लेकिन केंद्र का कहना है कि इससे ज्यादा दर तय की गई, तो प्रोडक्ट्स और सर्विसेस महंगी हो जाएंगी।
सवाल-जवाब में जानें, जीएसटी से आपको क्या मिलेगा?
1# आखिर क्या हो जाएगा जीएसटी से?
- जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स। इसे केंद्र और राज्यों के 20 से ज्यादा इनडायरेक्ट टैक्स के बदले लगाया जा रहा है। जीएसटी के बाद एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम, वैट/सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन कर, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, लग्जरी जैसे टैक्स खत्म होंगे।
2# इससे मुझे यानी आम लोगों को क्या फायदा?
- टैक्सों का जाल और रेट कम होगा: अभी हम अलग-अलग सामान पर 30 से 35% टैक्स देते हैं। जीएसटी में कम टैक्स लगेगा।
- एक देश, एक टैक्स: सभी राज्यों में सभी सामान एक कीमत पर मिलेगा। अभी एक ही चीज दो राज्यों में अलग-अलग दाम पर बिकती है, क्योंकि राज्य अपने हिसाब से टैक्स लगाते हैं।
3# जीएसटी अब तक अटका क्यों था?
- 17 साल पहले वाजपेयी सरकार ने इसकी नींव रखी थी। पर मेजॉरिटी ना होने के कारण यह टलता रहा।
- 2009 में यूपीए ने कोशिश की। ज्यादातर राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारें थीं। सभी नुकसान की भरपाई पर अड़ी थीं। अब केंद्र और ज्यादातर राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं।
4# दुनिया में 5 से 25% तक है जीएसटी
- जीएसटी 150 देशों में लागू हो चुका है। लेकिन रेट अलग-अलग हैं।
- जापान में 5%, सिंगापुर में 7%, जर्मनी में 19%, फ्रांस में 19.6% है।
- स्वीडन में 25%, ऑस्ट्रेलिया में 10%, कनाडा में 5%, न्यूजीलैंड में 15% और पाकिस्तान में 18% तक है।
5# क्या है इससे जुड़ा इंटरेस्टिंग फैक्ट?
- यह एक फैक्ट है कि पूरी दुनिया में जीएसटी लागू करने के बाद हुए चुनावों में कोई भी सरकार दोबारा नहीं चुनी गई है।
- क्यों: शुरुआती वर्षों में कुछ चीजें महंगी हो जाती हैं। इसका खमियाजा सरकार को भुगतना पड़ता है।

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