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उच्च शिक्षा मंत्री श्री पवैया ने आचार्यश्री से लिया आशीर्वाद

हिन्दी को बढ़ावा देने के प्रस्ताव पर होगा अमल

पाठ्यक्रमों में भारतीय संस्कृति और इतिहास को शामिल करने के प्रयास होंगे

उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज से गत दिवस भोपाल में भेंट कर आशीर्वाद लिया। आचार्यश्री ने श्री पवैया को शिक्षा क्षेत्र में हिन्दी को बढ़ावा देने और भारत के प्राचीन इतिहास को पाठ्यक्रम में जगह देने का सुझाव दिया।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री पवैया से आचार्यश्री ने कहा कि जिन देशों ने अंग्रेजों की नकल छोड़कर स्वभाषा और भाषा के आधार पर काम किया वो विकास की दृष्टि से आगे निकले।

भारत में स्वदेशी और स्वभाषा के बारे में जो हीन भावना फैलाने के जो प्रयास हुए, कि हिन्दी से उन्नत शिक्षा नहीं पायी जा सकती, इस भ्रमजाल को तोड़ना होगा।

आचार्यश्री के प्रस्ताव को शिरोधार्य करते हुए श्री पवैया ने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जहाँ मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय स्थापित ही नहीं किया, बल्कि तकनीकी शिक्षा हिन्दी में देने का निर्णय भी लिया। उन्होंने स्वयं की एक अंतर्राष्ट्रीय पहल पर चर्चा करते हुए कहा कि जब वह ग्वालियर से सांसद थे तब उन्होंने सन् 2002 में चिली (अमेरिका) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 120 वर्ष का इतिहास तोड़ते हुए न केवल हिन्दी में भाषण दिया, बल्कि राष्ट्र-भाषा को मान्यता भी दिलवायी।

श्री पवैया ने आचार्यश्री को आश्वस्त किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर केन्द्रीय-स्तर पर जब भी बैठक होगी, तब वे इस बात को रखेंगे कि केन्द्रीय लोक सेवा आयोग में हिन्दी को तबज्जो मिले और प्रदेश में पाठ्यक्रम पुनरीक्षित करते हुए उनकी भावनाओं के अनुसार भारतीय संस्कृति और इतिहास को शामिल करने पर जोर देंगे।

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