51 शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं की जान बचाकर सलीम बना हीरो
कहते हैं बचाने वाला, मारने वाले से कहीं ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बड़ा होता है. अनंतनाग में अमरनाथ यातà¥à¤°à¤¾ पर गठशà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं पर आतंकी हमले के दौरान लोगों ने à¤à¤¸à¥‡ ही à¤à¤• बचाने वाले को देखा. नाम है सलीम शेख. सलीम उस बस का डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¤° है, जिस पर सोमवार की रात आतंकवादियों ने हमला किया था लेकिन अंधाधà¥à¤‚ध गोलियों की बौछार के बीच सलीम ने अपनी जान की परवाह किठबग़ैर जिस तरह से बस में बैठे शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं की जान बचाने की कोशिश की, उस पर किसी को à¤à¥€ नाज़ हो सकता है.
अमरनाथ के बेगà¥à¤¨à¤¾à¤¹ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं पर अंधाधà¥à¤‚ध गोलियों की बौछार करने वाले आतंकवादी à¤à¥€ कहने को तो मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨ थे, लेकिन इसà¥à¤²à¤¾à¤® और मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨ के असल मायने कà¥à¤¯à¤¾ होते हैं, ये पता चला इस आतंकवादी हमले की जगह यानी अनंतनाग से दो हज़ार किलोमीटर दूर गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ के वलसाड से आठà¤à¤• दूसरे मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨ की बदौलत.
ये à¤à¤• इतà¥à¤¤à¥‡à¤«à¤¼à¤¾à¤• ही था कि हाथों में बंदूक लिठजो आतंकवादी हिंदू शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं की बस पर गोलियां चला रहे थे, उस बस को चलाने वाला कोई और नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤• मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨ ही था. नाम है सलीम शेख. इस आतंकवादी हमले के दौरान उसने वो काम किया, जो किसी à¤à¥€ इंसान का फरà¥à¤œ था. उसने खà¥à¤¦ अपनी ज़िंदगी की परवाह नहीं की और गोलियों की बौछार के बीच पूरी दिलेरी और जांबाज़ी के साथ अपनी बस चलाता रहा. और तो और हमले के दौरान à¤à¤• बार फिर बस का टायर पंकà¥à¤šà¤° हो गया. लेकिन सलीम शेख ने बस नहीं रोकी और करीब डेढ़ किलोमीटर तक तब तक अपनी बस दौड़ाता रहा, जब तक वो आतंकवादियों की पहà¥à¤‚च से बाहर नहीं निकल गई.
इसके बाद सलीम ने अपने घर में टेलीफ़ोन कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने सलामत होने की खबर तो दी, साथ ही ये à¤à¥€ कहा कि वो हरगिज़ टेलीविजन ना चलाà¤à¤‚, जिससे घर के दूसरे लोगों और खासकर बीमार लोगों को टेंशन हो. पतà¥à¤¨à¥€ ने बताया कि वो बस सिर à¤à¥à¤•ाकर बस चलाते रहे और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बस को आतंकियों की पहà¥à¤‚च से दूर कर दिया.
जमà¥à¤®à¥‚-कशà¥à¤®à¥€à¤° से दूर गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ के वलसाड में हमले की शिकार हà¥à¤ˆ बस के डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¤° सलीम के घर à¤à¤• अजीब सा माहौल है. à¤à¤• तरफ तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस बात सà¥à¤•ून और गरà¥à¤µ है कि उनका अपना सलीम इस हमले में ना सिरà¥à¤« सलामत बच गया, बलà¥à¤•ि उसने अपनी बस à¤à¤—ा कर दूसरों की जिंदगी बचाने की à¤à¥€ कोशिश की. लेकिन इस हमले में जो लोग मारे गà¤, उनके लिठइस परिवार के दिल में à¤à¥€ à¤à¤• अनकही तड़प सी है. शायद तà¤à¥€ सलीम के बहादà¥à¤°à¥€ का किसà¥à¤¸à¤¾ बताने की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ उसकी मां खà¥à¤¦ को मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤¤à¥€ हà¥à¤ˆ करती है, लेकिन जवाब देते-देते आगे उनका गला रà¥à¤‚ध जाता है और वो रोने लगती हैं.