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51 श्रद्धालुओं की जान बचाकर सलीम बना हीरो

कहते हैं बचाने वाला, मारने वाले से कहीं ज़्यादा बड़ा होता है. अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा पर गए श्रद्धालुओं पर आतंकी हमले के दौरान लोगों ने ऐसे ही एक बचाने वाले को देखा. नाम है सलीम शेख. सलीम उस बस का ड्राइवर है, जिस पर सोमवार की रात आतंकवादियों ने हमला किया था लेकिन अंधाधुंध गोलियों की बौछार के बीच सलीम ने अपनी जान की परवाह किए बग़ैर जिस तरह से बस में बैठे श्रद्धालुओं की जान बचाने की कोशिश की, उस पर किसी को भी नाज़ हो सकता है.

अमरनाथ के बेगुनाह श्रद्धालुओं पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार करने वाले आतंकवादी भी कहने को तो मुसलमान थे, लेकिन इस्लाम और मुसलमान के असल मायने क्या होते हैं, ये पता चला इस आतंकवादी हमले की जगह यानी अनंतनाग से दो हज़ार किलोमीटर दूर गुजरात के वलसाड से आए एक दूसरे मुसलमान की बदौलत.

ये एक इत्तेफ़ाक ही था कि हाथों में बंदूक लिए जो आतंकवादी हिंदू श्रद्धालुओं की बस पर गोलियां चला रहे थे, उस बस को चलाने वाला कोई और नहीं, बल्कि एक मुसलमान ही था. नाम है सलीम शेख. इस आतंकवादी हमले के दौरान उसने वो काम किया, जो किसी भी इंसान का फर्ज था. उसने खुद अपनी ज़िंदगी की परवाह नहीं की और गोलियों की बौछार के बीच पूरी दिलेरी और जांबाज़ी के साथ अपनी बस चलाता रहा. और तो और हमले के दौरान एक बार फिर बस का टायर पंक्चर हो गया. लेकिन सलीम शेख ने बस नहीं रोकी और करीब डेढ़ किलोमीटर तक तब तक अपनी बस दौड़ाता रहा, जब तक वो आतंकवादियों की पहुंच से बाहर नहीं निकल गई.

इसके बाद सलीम ने अपने घर में टेलीफ़ोन कर उन्हें अपने सलामत होने की खबर तो दी, साथ ही ये भी कहा कि वो हरगिज़ टेलीविजन ना चलाएं, जिससे घर के दूसरे लोगों और खासकर बीमार लोगों को टेंशन हो. पत्नी ने बताया कि वो बस सिर झुकाकर बस चलाते रहे और उन्होंने बस को आतंकियों की पहुंच से दूर कर दिया.

जम्मू-कश्मीर से दूर गुजरात के वलसाड में हमले की शिकार हुई बस के ड्राइवर सलीम के घर एक अजीब सा माहौल है. एक तरफ तो उन्हें इस बात सुकून और गर्व है कि उनका अपना सलीम इस हमले में ना सिर्फ सलामत बच गया, बल्कि उसने अपनी बस भगा कर दूसरों की जिंदगी बचाने की भी कोशिश की. लेकिन इस हमले में जो लोग मारे गए, उनके लिए इस परिवार के दिल में भी एक अनकही तड़प सी है. शायद तभी सलीम के बहादुरी का किस्सा बताने की शुरुआत उसकी मां खुद को मुस्कुराती हुई करती है, लेकिन जवाब देते-देते आगे उनका गला रुंध जाता है और वो रोने लगती हैं.

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