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श्रीनिवासन और शाह अयोग्य हैं, क्रिकेट बॉडी को रिप्रेजेंट कैसे कर सकते हैं: SC

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन और निरंजन शाह से कहा है कि वे किसी क्रिकेट संस्था के रिप्रेजेंटेटिव्स कैसे बन सकते हैं जबकि उन्हें अयोग्य करार दिया जा चुका है। क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर्स की कमेटी (CoA) ने अपनी रिपोर्ट में श्रीनि और शाह पर आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही बीसीसीआई के पूर्व प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर की बिना शर्त माफी शुक्रवार को मंजूर कर ली। कोर्ट ने ठाकुर पर लगा कन्टेम्ट ऑफ कोर्ट का आरोप और उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई भी रद्द कर दी है। सीओए ने अपनी रिपोर्ट में लगाए थे आरोप...

- क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर्स की कमेटी (CoA) ने 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में जमा अपनी चौथी रिपोर्ट में कहा था कि निरंजन शाह और एन. श्रीनिवासन जैसे नाकाबिल अफसर अपने निजी हितों के चलते लोढ़ा कमेटी के सुधार लागू करने में बाधा पैदा कर रहे हैं। इससे पहले रिपोर्ट इसी साल 27 फरवरी, 17 मार्च और सात अप्रैल को जमा की गई थी।
- शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनिवासन और शाह को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर हैरानी जताई कि आखिर कैसे किसी भी राज्य एसोसिएशन का मेंबर बनने के लिए अयोग्य करार दिया जा चुका शख्स तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन का नुमाइंदा बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मुद्दे पर 24 जुलाई को फैसला सुनाएगा।
श्रीनि-शाह पर क्या हैं आरोप?
1. CoA ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि श्रीनिवासन बीसीसीआई की किसी भी राज्य एसोसिएशन के मेंबर बनने के काबिल नहीं हैं, फिर भी उन्होंने तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन के रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर बोर्ड की एसजीएम (स्पेशल जनरल मीटिंग) में हिस्सा लिया।
2. रिपोर्ट के मुताबिक, "26 जून की एसजीएम में कई लोगों ने हिस्सा लिया जो बीसीसीआई के पदाधिकारी पद से (office bearers) अयोग्य करार दिये जा चुके हैं, इनमें एन श्रीनिवासन और निरंजन शाह शामिल हैं। इनके निजी स्वार्थ हैं जिसके चलते ये लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू नहीं होने दे रहे।"
3. सीओए ने सुप्रीम कोर्ट में एक ऑडियो फाइल भी जमा की है जिसमें संकेत है कि 26 जून की मीटिंग में कुछ अयोग्य मेंबर्स ने बाधा डालने की कोशिश की।
श्रीनि के वकील का तर्क
- श्रीनिवासन के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सीओए को 'श्रीनिवासन फोबिया' है। इसका एक ही एजेंडा श्रीनिवासन की आलोचना करना है। सिब्बल ने कहा कि तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन को बीसीसीआई की मीटिंग के लिए अपना रिप्रेजेंटेटिव चुनने का पूरा हक है।
कोर्ट ने COA के लिए 2 नाम मांगे
- सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी पक्षों से CoA मेंबरशिप के लिए सीलबंद लिफाफे में 2 नाम भी मांगे हैं। बता दें कि रामचंद्र गुहा और विक्रम लिमये ने सीईओ की मेंबरशिप से इस्तीफा दे दिया था।
- इसी साल 30 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 4 मेंबर्स वाली CoA बनाई थी, जो बीसीसीआई का काम देख रही है। इस कमेटी के प्रेसिडेंट पूर्व सीएजी विनोद राय हैं। गुहा के अलावा इस कमेटी में महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान डायना एडुल्जी और लिमये भी थे।
ठाकुर पर क्या था आरोप?
- BCCI के पूर्व प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को अवमानना केस में सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी। पिछले साल जब लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू करने का मामला चल रहा था, तब ठाकुर ने आईसीसी चेयरमैन शशांक मनोहर से एक लेटर लिखने को कहा था, जिसमें ये कहा जाए कि BCCI में CAG का अप्वॉइंटमेंट सरकारी दखल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवमानना करार दिया था।
- 7 जुलाई को अवमानना मामले की सुनवाई हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने ठाकुर के वकील से कहा था कि उनके मुवक्किल खुद कोर्ट में पेश होकर एक शॉर्ट एफिडेविट के जरिए बिना शर्त माफी मांगे। कोर्ट ने तभी ये इशारा भी किया था कि अगर ठाकुर ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना केस वापस लिया जा सकता है।

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