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बहन जी' पर अमित शाह का 'माया' जाल

नई दिल्ली: à¤²à¤¾à¤²à¥‚ के परिवार पर पड़े केंद्रीय एजेसियों के छापों के बाद बिहार में पैदा हुए संकट के तार उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए हैं। इन तारों का एक सिरा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हाथ में है जिनके लिए 2019 में भी उत्तर प्रदेश में 2014 जैसा प्रदर्शन करना बेहद जरूरी है। इस प्रदर्शन के लिए भाजपा को दलित वोट का वैसा ही समर्थन चहिए जैसा उसे 2014 में मिला था।

यदि मायावती इन दो सालों में सक्रिय हुई तो भाजपा को उसका नुकसान हो सकता है। लिहाजा माया की सक्रियता को रोकने के लिए बिहार की तीनों पार्टियों कांग्रेस, जद(यू) और राजद में तोड़-फोड़ करवाई जा रही है।

क्या है बिहार कनेक्शन?
दरअसल, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद मायावती का कार्यकाल अगले साल अप्रैल में खत्म हो रहा है। यूपी विधानसभा में बसपा की इतनी हैसियत नहीं है कि वह अपने दम पर मायावती को रा’यसभा में भेज सके। बसपा के पास यूपी विधासभा में महज 19 सदस्य हैं जो मायावती को राज्यसभा में भेजने के लिए काफी नहीं है। विपक्ष में सेक्यूलर वोटों के झंडाबरदार बने लालू प्रसाद यादव किसी भी तरीके से मायावती को राज्यसभा पहुंचाने के पक्ष में हैं। माना जा रहा है कि यदि जरूरत हुई तो वह माया को राजद के कोटे से भी राज्यसभा भेज सकते हैं। लालू के पास मायावती को राज्यसभा भेजने का दूसरा विकल्प सपा का सर्मथन दिलाना है।

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