इस मंदिर में à¤à¤—वान राम ने गà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¾ चार माह का समय
जगदलपà¥à¤°à¥¤ जगदलपà¥à¤° से 43 किमी दूर छतà¥à¤¤à¥€à¤¸à¤—ढ़ और ओड़िशा राजà¥à¤¯ की सीमा पर कोलाब नदी के किनारे पहाड़ी की गà¥à¤«à¤¾ में पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक पिणà¥à¤¡ के रूप में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ हैं गà¥à¤ªà¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤°à¥¤ सावन में महीने में जैपà¥à¤° होकर गà¥à¤ªà¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° जाना पड़ता है।
विशेषता
गà¥à¤«à¤¾ में विराजित गà¥à¤ªà¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° शिवलिंग पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक है। करीब पांच फीट ऊंचा यह पिणà¥à¤¡ काले पतà¥à¤¥à¤°à¥‹à¤‚ की गà¥à¤«à¤¾ के à¤à¥€à¤¤à¤° है। गà¥à¤«à¤¾ से लगी करीब 100 फीट लंबी कारी गाय नामक à¤à¤• और गà¥à¤«à¤¾ है । यहां à¤à¥€ à¤à¤• शिवलिंग है। जिस पर गà¥à¤«à¤¾ का पानी बूंद- बूंद कर टपकता रहता है।
गà¥à¤«à¤¾ में सà¥à¤Ÿà¥‡à¤²à¥‡à¤—à¥à¤®à¤¾à¤‡à¤Ÿ और सà¥à¤Ÿà¥‡à¤²à¥‡à¤•à¥à¤†à¤‡à¤Ÿ की संरचनाà¤à¤‚ हैं। महाशिवरातà¥à¤°à¤¿ पर आयोजित दो दिवसीय मेला के दौरान दोनों राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ लाखों शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ यहां पहà¥à¤‚चते हैं। नदी में पà¥à¤² नहीं है, इसलिठवन विà¤à¤¾à¤— बांस की खपचà¥à¤šà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और बलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से असà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ पà¥à¤² बनाकर à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ के लिठगà¥à¤ªà¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° दरà¥à¤¶à¤¨ सà¥à¤²à¤ कर देता है।
लोक मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾
गà¥à¤ªà¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° के संदरà¥à¤ में पौराणिक मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि à¤à¤—वान राम वनवास का अधिकांश समय दणà¥à¤¡à¤•ारणà¥à¤¯ में वà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ हà¥à¤† था। वनगमन के दौरान बारिश के चार माह वे इस गà¥à¤«à¤¾ में बिताते हà¥à¤ शिव आराधना किठथे। पहाड़ी के ऊपर गà¥à¤«à¤¾ में गà¥à¤ªà¥à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर विराजित होने के कारण यह शिवालय गà¥à¤ªà¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° कहलाता है।