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RSS के स्वयंसेवक से रायसीना हिल्स तक, देखें रामनाथ कोविंद का पूरा सफर

एनडीए की ओर से उम्मीदवार घोषित किए गए बिहार के पूर्व गर्वनर रामनाथ कोविंद देश के अगले राष्ट्रपति होंगे. रामनाथ कोविंद ने चुनाव में यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार को भारी अंतर से हराया. रामनाथ कोविंद को जीत के लिए 5,52,243 वोट चाहिए थे, रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे. रामनाथ कोविंद को कुल वोट 10,98903 में से 702044 मिले हैं जबकि मीरा कुमार को 367314 वोट मिले.रामनाथ कोविंद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक रहे, ये पहली बार होगा कि कोई स्वयंसेवक देश का राष्ट्रपति होगा. कोविंद के राजनीतिक सफर में कई मोड़ आए. इन्होंने कई तरह की भूमिका निभाई. इन्होंने एक समाज सेवी, एक वकील और एक राज्यसभा सांसद के तौर पर काम किया. लेकिन इनकी पिछली पृष्टभूमि में जाए तो वो एक बहुत ही साधारण इंसान थे.कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को हुआ था. उनका जन्म एक बहुत ही साधारण परिवार में हुआ. उस वक्त देश अंग्रेजों का गुलाम था. उस समय दलित होना किसी अपराध से कम न था.कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के गांव परौंख में जन्मे रामनाथ कोविंद ने सर्वोच्च न्यायालय में वकालत से कॅरियर की शुरुआत की थी. वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव बने थे, इसके बाद भाजपा नेतृत्व के संपर्क में आए. कोविंद ने दिल्ली में रहकर IAS की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की. लेकिन मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी. जून 1975 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनने पर वे वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव रहे थे. जनता पार्टी की सरकार में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर कार्य किया.इससे पहले भी वो अपनी राह में आने वाले तमाम विरोधियों को पीछे छोड़ चुके हैं. सबसे पहले तो कोविंद ने अपने गांव की इस गरीबी को पछाड़ा. बता दें कि गरीबी की वजह से बचपन में रामनाथ कोविंद 6 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे और फिर पैदल ही 6 किलोमीटर वापस घर लौटते थे. गांव में रहने वाले रामनाथ कोविंद के साथियों को जहां उनकी काबिलियत पर नाज है. वहीं कोविंद की दरियादिली के भी वो कायल हैं. गरीबी में पैदा हुए रामनाथ कोविंद आगे चलकर एक नामी वकील हुए. बिहार के राज्यपाल भी बने, लेकिन जायदाद के नाम पर उनके पास आज भी कुछ नहीं है. एक घर था वो भी गांववालों को दान कर दिया.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामनाथ कोविंद को जीत के बाद बधाई दी. मोदी ने इस दौरान दो फोटो शेयर किए. पीएम ने कोविंद के साथ अपना 20 साल पुरानी तस्वीर साझा की.

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