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33 लाख के प्रिंटिंग घोटाले की दोषी आईएएस शशि कर्णावत बर्खास्त

भोपाल। 1999 बैच की आईएएस अफसर शशि कर्णावत को केंद्र सरकार ने बर्खास्त कर दिया। वे 33 लाख रुपए के प्रिंटिंग घोटाले में दोषी पाई गई थीं। सरकार ने उन्हें बर्खास्त करने की सिफारिश केंद्र से की थी। शशि पिछले चार साल से निलंबित थीं। अरविंद-टीनू जोशी के बाद कर्णावत मध्यप्रदेश की तीसरी ऐसी अधिकारी हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को लेकर बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई है। सामान्य प्रशासन विभाग की सचिव 'कार्मिक" रश्मि अरुण शमी ने कर्णावत को बर्खास्त किए जाने के आदेश की पुष्टि की है।

मंडला में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी रहते कर्णावत पर प्रिंटिंग मामले में अनियमितता के आरोप लगे थे। जांच में उन्हें दोषी पाया गया। इस आधार पर सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने सरकार को जमकर घेरा और अनशन पर भी बैठी थीं। दिसंबर 2016 में सरकार ने कर्णावत को बर्खास्त करने के लिए प्रकरण केंद्र को भेज दिया था। संघ लोकसेवा आयोग से होता हुआ मामला केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय पहुंचा और आखिरकार उन्हें बर्खास्त करने का फैसला हो गया। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कर्णावत को बर्खास्त करने का आदेश मिल गया है।

कर्णावत पर ये थे आरोप

बर्खास्त आईएएस अफसर शशि कर्णावत मंडला में साल 1999-2000 में हुए प्रिंटिंग घोटाले में दोषी पाई गई थीं। मंडला के विशेष न्यायालय ने सितंबर 2013 में उन्हें घोटाले में दोषी पाते हुए पांच साल के कारावास की सजा के साथ 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। वे जमानत लेकर जेल से बाहर आ गई थीं। उन्हें सरकार ने निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी थी।

जनता को बताएंगे सरकार का झूठ: कर्णावत

फैसले के बाद कर्णावत ने 'नवदुनिया' से कहा कि मुख्यमंत्री लगातार भरोसा दिलाते रहे कि तुम्हारे साथ न्याय होगा। बार-बार दस्तावेजों के साथ मंत्रालय बुलाया पर सब-कुछ दिखावा था। इससे सरकार की कथनी और करनी उजागर हो गई है। अब हम जनता को सरकार का झूठ बताएंगे। इसे फैसले से सरकार की उलटी गिनती शुरू हो गई है।

आईएएस एमके सिंह को दी जा चुकी है अनिवार्य सेवानिवृत्त

उधर, करीब एक माह पहले ही केंद्र सरकार ने राज्य कैडर के 1985 बैच के आईएएस अधिकारी एमके सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी है। सिंह के खिलाफ सर्विस रिकॉर्ड खराब होने के आधार पर कार्रवाई की गई है। प्रदेश की छानबीन समिति ने सिंह का नाम अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए भेजा था। वहीं, दो आईएफएस अफसर वीएस होतगी और देवेश कोहली को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का प्रस्ताव केंद्र को करीब आठ माह पहले भेजा जा चुका है। दोनों अधिकारियों को लेकर कभी भी फैसला हो सकता है।

प्रदेश में भी जल्द हो सकती है बड़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी लगातार भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दे रहे हैं। पिछले दिनों ही उन्होंने कलेक्टरों को भ्रष्ट अफसरों की सूची बनाने और सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव देने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि एक-दो माह में राज्य स्तर पर भ्रष्ट अफसरों को लेकर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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