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ग्वालियर-चंबल का बढ़ा राष्ट्रीय कद... बीजेपी संगठन में अंचल के 3 दिग्गजों को मिली नई जिम्मेदारी

ग्वालियर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने श्रावण मास के तीसरे सोमवार को अपनी राष्ट्रीय टीम घोषित कर ग्वालियर-चंबल अंचल को संगठन में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। प्रदेश के सात नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिली है, जिनमें तीन चेहरे ग्वालियर-चंबल अंचल से हैं। इससे दिल्ली और भोपाल की राजनीति में अंचल का कद बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही इन नेताओं और भाजपा संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने राजनीतिक गढ़ में पार्टी की जमीन को और मजबूत करने की है। अंचल में भाजपा के पास संगठन और नेतृत्व की दृष्टि से मजबूत ढांचा है।

 

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रभावशाली जननेता हैं, जबकि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को लंबे समय से कुशल संगठक के रूप में देखा जाता है। इसके बावजूद पिछले कुछ चुनावों के घटनाक्रम ने यह संकेत जरूर दिया है कि केवल मजबूत संगठन और बड़े चेहरों के भरोसे अंचल में राजनीतिक बढ़त कायम रखना आसान नहीं है।

अंचल की राजनीति में युवा चेहरे का प्रार्दुभाव

भाजपा ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रदेश मीडिया प्रभारी का दायित्व संभाल रहे आशीष अग्रवाल को मीडिया टीम का सह-संयोजक दायित्व सौपा है। इससे अंचल की राजनीति में एक नये युवा चेहरे का प्रादुर्भाव हुआ है, जो कि वैश्य समाज से आते है।

उपचुनावों ने बढ़ाई चिंता

विजयपुर और दतिया विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में भाजपा की हार ने संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी की है। खासतौर पर बसपा के कमजोर पड़ने के बाद अंचल में कांग्रेस को भाजपा के सामने मजबूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए अब चुनौती केवल चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन और सामाजिक समीकरणों को लगातार मजबूत बनाए रखने की है।

राष्ट्रीय जिम्मेदारियों का स्थानीय असर

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभाल चुके वीडी शर्मा को प्रकोष्ठ संकुल का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है। संगठनात्मक दृष्टि से यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। वहीं लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। आर्य अनुसूचित वर्ग के प्रमुख नेताओं में माने जाते हैं और ग्वालियर-चंबल में अनुसूचित वर्ग का बड़ा सामाजिक प्रभाव है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका का इस्तेमाल भाजपा के सामाजिक आधार को और व्यापक बनाने में भी किया जा सकता है। राष्ट्रीय संगठन में बढ़ती भूमिका का असर भाजपा की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ना स्वाभाविक है। सिंधिया और तोमर जैसे बड़े चेहरों के बीच संगठन के अन्य नेताओं की भूमिका और प्रभाव का संतुलन भी महत्वपूर्ण रहेगा।

राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से अंचल के नेताओं का राजनीतिक वजन बढ़ा है, लेकिन अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि दिल्ली में बढ़े राजनीतिक कद को ग्वालियर-चंबल की जमीन पर संगठनात्मक मजबूती में कैसे बदला जाए। लोकसभा में क्लीन स्वीप के बावजूद विधानसभा स्तर पर कांग्रेस की चुनौती कायम है।

2018 में खिसकी जमीन, 2020 में बदला समीकरण

इस चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल थे और उनके प्रभाव का असर अंचल के चुनाव परिणामों में साफ दिखाई दिया। इसके बाद 2020 में सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने से पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक नेताओं और विधायकों के भाजपा में आने से पार्टी की विधानसभा में स्थिति मजबूत हुई।

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