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खुद बीमार हुआ AIIMS, लगातार नौकरी छोड़ रहे डॉक्टर

रायपुर में एम्स खुल जाने से राज्य की जनता को उम्मीद थी कि अब उन्हें न केवल अच्छा इलाज मुहैया होगा बल्कि इलाज के नाम पर प्राइवेट अस्पतालों की खुली लूट से भी बचाव होगा. लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है.

एम्स में डॉक्टरों की भर्ती के बावजूद न तो मरीजों का सही ढंग से इलाज हो पा रहा है और न ही वहां डॉक्टर टिक पा रहे हैं. ज्वॉइन करने के चंद दिनों में ही यहां उपलब्ध डॉक्टर इस्तीफा देकर रायपुर के ही निजी अस्पतालों में नौकरी करने लगे हैं. इसके लिए एम्स के मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.

एम्स रायपुर में न्यूरोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, ऑर्थोपेंडिक सर्जन, सीटीवीएस सर्जन, एनिस्थियोलॉजिस्ट ने ज्वॉइन किया था. लेकिन ज्यादातर डॉक्टर चंद दिनों बाद ही एम्स का साथ छोड़कर दूसरे प्राइवेट अस्पतालों में चले गए. यही हाल प्लास्टिक सर्जरी और बर्न यूनिट में तैनात डॉक्टरों का है.

दोनों यूनिट में डॉक्टरों ने ज्वॉइन किया और अस्पताल का माहौल देखकर चलते बने. उन्होंने भी अपना इस्तीफा एम्स को सौंप दिया. बताया जाता है कि बर्न यूनिट में पदस्थ सर्जन इस बात से नाराज थे कि मैनेजमेंट के निर्देश पर मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किया जा रहा था.

अब हाल यह हो गया है कि प्लास्टिक सर्जरी और बर्न यूनिट में डॉक्टरों का टोटा हो गया है. बर्न यूनिट के तमाम केस सीधे प्राइवेट अस्पतालों को रेफर हो रहे हैं. जो मरीज यहां भर्ती हो रहे हैं उन्हें एम्स प्रबंधन अपने हाल पर छोड़ रहा है.

 

एम्स रायपुर के सुपरिटेंडेंट डॉक्टर अजय दानी के मुताबिक बर्न और प्लास्टिक यूनिट में डॉक्टरों की भर्ती हुई थी. वे सेटअप के अनुसार काम भी कर रहे थे, लेकिन अचानक उन्होंने नौकरी छोड़ दी. उनके मुताबिक डॉक्टरों की भर्ती हेतु नए सिरे से विज्ञापन जारी किया गया है. हालांकि, डॉक्टर अजय दानी ने यह नहीं बताया कि आखिर क्यों डॉक्टर ज्वॉइनिंग के बाद नौकरी छोड़ रहे हैं.

रायपुर में एम्स खुलने के बाद सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि सीमावर्ती राज्य झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महारष्ट्र के भी मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं. ऐसे में इस संस्थान में डॉक्टरों की मौजूदगी और यहां का माहौल बेहद मायने रखता है.

एम्स मैनेजमेंट को इस पर गौर करना होगा. बताया तो यह भी जा रहा है कि एम्स में मरीजों का अच्छा इलाज होने से प्राइवेट अस्पतालों का भविष्य खतरे में पड़ गया था. इसलिए इस संस्थान को सोची समझी रणनीति के तहत डॉक्टरों का एक गिरोह कमजोर करने में जुटा है.

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