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यूपी चुनाव में ना गुंडई चली, ना फतवे

जिन बाहुबलियों को कहीं कोई ठिकाना नहीं मिला उन्हें बसपा ने टिकट देकर अपना उम्मीदवार बना लिया. उम्मीद थी कि बाहुबलियों के जरिए ही सही कुछ सीट का इजाफा तो होगा. कुछ इसी सोच के साथ मतदान से ऐन वक्त पहले बसपा उलेमाओं के दर पर पहुंच गई. मुस्लिम धर्मगुरुओं से पार्टी के हक में वोट देने की अपील करा डाली. लेकिन नतीजा, कुछ अतिरिक्त सीट दिलाना तो दूर बाहुबली अपने चहेतों की सीट भी नहीं बचा पाए. वहीं उलेमाओं की अपील पर बसपा के मुस्लिम उम्मीदवारों तक को जीत नसीब नहीं हुई.
टिकट वितरण के आखिरी वक्त में सपा ने बाहुबली अतीक अहमद सैफी को ठेंगा दिखाते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इतना ही नहीं मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के विलय को भी खारिज कर दिया था. अंसारी को लेने से बीएसपी को नुकसान ज्‍यादा दिख रहा है.

बाहुबलियों के सियासी नतीजे आने के बाद आज शायद सपा मुखिया मुस्करा रहे होंगे. उन्हें अपने फैसले पर फख्र हो रहा होगा. वहीं बसपा उस वक्त को कोस रही होगी जब उसने सपा से बाहर का रास्ता दिखाए गए बाहुबलियों को पार्टी का उम्मीदवार बनाया था.
लेकिन नतीजे सामने आने के बाद बाहुबलियों के सहारे सरकार बनाने का ख्वाब चकनाचूर हो चुका है. सियासी जानकारों की मानें तो कौमी एकता दल वर्ष 2010 में बना है, लेकिन पूर्वी यूपी के पांच जिलों में अंसारी बंधुओं का प्रभाव माना जाता है. यह पांच जिले हैं गाजीपुर, मऊ, बलिया, वाराणसी और आजमगढ़. इनमें 20 विधानसभा सीटें मुस्‍लिम बहुल हैं. बात बाहुबली नेता मुख्‍तार अंसारी की हो या फिर अफजाल अंसारी और सिगब्तुल्‍ला अंसारी की, हर एक ने वोटरों के बीच एक पहचान कायम की हुई है. हालांकि वे बीएसपी को फायदा नहीं दिला पाए.
ये हैं अंसारी परिवार के प्रमुख लोग
अफजाल अंसारी- अफजाल दो बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं. वर्ष 2004 में वह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे. उन्‍होंने 4,15687 वोट हासिल कर भाजपा के मनोज को हराया था. मनोज को 1,88910 ही वोट मिले थे. लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में अफजाल बसपा की टिकट पर सपा के राधेमोहन से चुनाव हार गए थे. करीब 70 हजार वोटों से उनकी हार हुई थी। सपा के उम्‍मीदवार को 3,79233 वोट मिले थे. अफजाल पार्टी के महासचिव हैं.
मुख्‍तार अंसारी- मुख्‍तार अंसारी लगातार मऊ से यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ते रहे हैं. एक बार बसपा और कौमी एकता दल से तो दो बार निर्दलीय चुनाव लड़ा था. पहला चुनाव वर्ष 1996 में लड़ा था, जिसमें उन्‍हें 45.85, 2002 में 46.6, 2007 46.78 और 2012 के चुनावों में 31.34 प्रतिशत वोट मिले थे. उन्‍होंने वर्ष 2002 में वाराणसी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था. लेकिन भाजपा के मुरली मनोहर जोशी से वह चुनाव हार गए थे. जोशी को 30.52 और मुख्‍तार को 27.94 प्रतिशत वोट मिले थे. मुख्‍तार अंसारी कौमी एकता दल के प्रमुख हैं.
सिगब्‍तुल्‍ला अंसारी- सिगब्‍तुल्‍ला अंसारी ने वर्ष 2012 में यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ा. उन्‍होंने सपा के उम्‍मीदवार को चुनाव हराया था. चुनाव में उन्‍हें 66922 वोट और सपा उम्‍मीदवार को 59589 वोट मिले थे.

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