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डीजीपी बनते ही बोले सुलखान सिंह, दोषी कोई भी हो नहीं बख्शा जाएगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश का डीजीपी बनाए जाने के बाद सुलखान सिंह ने शनिवार को साफ और सख्त शब्दों ने कहा कि अगर कोई आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाया गया तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उन्हें साफ निर्देश हैं कि अपराधी चाहे सत्त पक्ष का हो या कोई और उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुलखान सिंह ने यह बातें यूपी डीजीपी का पदभार संभालने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस जनता की सेवा के लिए है और किसी के भी साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया जाएगा, जो अपराधी हैं उन्हें सजा मिलेगी। किसी भी तरह की गुंडागर्दी पर यूपी पुलिस निष्पक्षता से कार्रवाई करेगी।

इस दौरान उन्होंने एक सवाल के जवाब में पुलिसकर्मियों को सप्ताह में एक दिन अवकाश और अन्य सुविधाएं मिलने की बात का भी समर्थन किया।

बता दें कि सुलखान सिंह 1980 की बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और उन्हें यूपी के पूर्व डीजीपी जावीद अहमद की जगह नियुक्त किया गया है। बांदा जिले के निवासी सुलखान सिंह 30 सितंबर, 2017 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। संभव है कि सरकार उनका कार्यकाल बढ़ाने की भी सिफारिश करे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की यह गाइड लाइन है कि डीजीपी की तैनाती दो वर्ष के लिए की जाए।

सुलखान सिंह सख्त अफसर माने जाते हैं। बसपा सरकार के दौरान उन्होंने भर्ती घोटाले की जांच की थी। सपा सरकार के आने के बाद लंबे समय तक उन्हें महत्वहीन पद पर तैनात किया गया। बहुत बाद में उन्हें डीजी प्रशिक्षण बनाया गया।

चुनाव के दौरान भाजपा ने लगातार डीजीपी जावीद अहमद को हटाने की निर्वाचन आयोग से मांग की। तब आरोप था कि सपा सरकार ने दर्जनभर अधिकारियों की वरिष्ठता की अनदेखी कर जावीद को डीजीपी बनाया है, लिहाजा उनसे निष्पक्षता की अपेक्षा नहीं की जा सकती है।

सपा सरकार ने मुस्लिम एंगल से जावीद अहमद को डीजीपी बनाया था। माना जा रहा था कि भाजपा सरकार बनते ही जावीद को हटा दिया जाएगा। हालांकि योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद एक माह से अधिक समय तक जावीद अहमद को कुर्सी पर बनाए रखा।

उन्हें डीजी पीएसी जैसे महत्वपूर्ण पद पर स्थानांतरित भी किया गया है। एडीजी कानून-व्यवस्था दलजीत सिंह चौधरी को भी ईओडब्लू जैसा महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया है। भाजपा सरकार ने नए चयन में वरिष्ठता का ध्यान रखा है।

एडीजी कानून-व्यवस्था बनाए गए आदित्य मिश्रा 1989 बैच के अधिकारी हैं और वह गोरखपुर जोन के आइजी भी रह चुके हैं। इसके अलावा 1987 बैच के आइपीएस अधिकारी भवेश कुमार सिंह को एडीजी अभिसूचना की जिम्मेदारी मिली है।

भवेश कुमार सिंह भी गोरखपुर जोन के आइजी रह चुके हैं और मेरठ और आगरा जोन के आइजी का भी दायित्व निर्वहन कर चुके हैं।

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